1 नवंबर 2026,

रविवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

7 दिन से चल रहे अंधड़ ने बढ़ार्इ भारत-पाकिस्तान सीमा पर सीमा सुरक्षा बल के जवानों की परेशानियां

भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में पिछले दिनों से चल रहे 50-60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार वाली हवाओं ने सीमा सुरक्षा बल के जवानों की परेशानियों में इजाफा कर दिया है।  
3 min read
Follow Patrika on Google News
Google source verification

जैसलमेर

•

image

Santosh Trivedi

•

Updated: 17 Jun 2018, 12:02 PM IST

Dust Storm in rajasthan

जैसलमेर। सीमावर्ती जैसलमेर जिले के भारत-पाकिस्तान सीमा क्षेत्र में पिछले दिनों से चल रहे 50-60 किलोमीटर प्रतिघंटा की रफ्तार वाली हवाओं ने सीमा सुरक्षा बल के जवानों की परेशानियों में इजाफा कर दिया है।

जिले के शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स पर इन दिनों रेत के धोरे तेजी से अपनी जगह बदल रहे हैं और अंतरराष्ट्रीय सीमा की तारबंदी हवा में झूल रही है। उसकी सुरक्षा में भी बल के सीमा प्रहरी धूल के थपेड़ों के वार झेलते हुए दिन-रात चौकसी बरत रहे हैं।

रही-सही कसर सीमा क्षेत्र में विद्युत आपूर्तिव्यवस्था ने ठप होकर पूरी कर दी है। बियाबान सीमा क्षेत्र में सायं-सायं करती आंधियों के चलते दृष्यता बेहद कम है। जवान सिर व मुंह को पटके से ढंक कर तथा काले चश्मे आंखों पर चढ़ाए रखते हैं।

शाहगढ़ बल्ज इलाके में शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स की समस्या के मद्देनजर अंधड़ के इस दौर में बल ने पेट्रोलिंग में बढ़ोतरी कर दी है। इसके अलावा अलार्मिंग का सहारा लिया जा रहा है। ज्यादा संख्या में जवानों की तैनाती की जा रही है।

केंद्र सरकार के इंजीनियरिंग डिपार्टमेंट की ओर से धोरों के खिसकने से तारबंदी के नीचे दब जाने की समस्या के समाधान के लिए कार्य हाथ में लिया गया है। जानकारी के अनुसार केंद्र सरकार ने इस संबंध में बजट जारी करना भी शुरू किया है।

गौरतलब है कि अंधड़ के चलते शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में धोरों के सरकने और उनके ऊंचे होने की समस्या विकराल बन गई है। वहां की गई सिंगल फेंसिंग के साथ 10 मीटर की गहराई और इतनी ही ऊंचाई में लोहे के एंगल पर लगाए जाने वाले रिफ्लेक्टर तक रेत के नीचे दब जाते हैं।

बल के प्रहरियों को अनुभव के आधार पर सीमा की रखवाली का जिम्मा उठाना पड़ता है। यहां फ्लड लाइट की व्यवस्था नहीं होने से रात के समय सीमा प्रहरियों को टॉर्च तथा ड्रेगन लाइट की मदद लेनी होती है।जानकारी के अनुसार जिले में लगातार चल रहे अंधड़ के कारण सीमाई इलाकों में बिजली आपूर्ति बंद हो चुकी है।

सीमा सुरक्षा बल की तरफ से जनरेटर की व्यवस्था सभी चौकियों पर की गई है। जानकारी के मुताबिक इन जनरेटरों को शाम के समय काम में लिया जाता है। जिससे तारबंदी पर फ्लड लाइटें जलाने से लेकर सीमा चौकियों पर रोशनी की जाती है।

लेकिन दिन के समय जवानों को इस भीषण गर्मी व अंधड़ का सामना बिना बिजली ही करना पड़ता है क्योंकि जनरेटर में खर्च करने के लिए डीजल की सीमा है। सीमा क्षेत्र में दसियों स्थानों पर खंभों के गिरने अथवा तारों के टूटने से बिजली आपूर्ति व्यवस्था में व्यवधान उत्पन्न हुआ है।

इस सम्बन्ध में सीमा सुरक्षा बल जोधपुर के आईजी अनिल पालीवाल का कहना है कि शाहगढ़ बल्ज क्षेत्र में सीमा सुरक्षा में आ रही परेशानियों का स्थायी समाधान करवाया जाएगा। यहां तारबंदी की ऊंचाई को बढ़ाने के साथ जरूरी रिपेयरिंग भी करवाई जाएगी। इंजीनियरिंग विभाग अपने कार्य में जुट गया है। उनके अनुसार अंधड़ में भी बल के जवान मुस्तैदी से कर्तव्य पथ पर जुटे हुए हैं।

7 दिन से अंधड़ ने सीमा पर बढ़ा रखी है परेशानियां
32 किमी लम्बा शाहगढ़ बल्ज का शिफ्टिंग सेंड ड्यून्स क्षेत्र
472 किमी लम्बी अंतरराष्ट्रीय सीमा जैसलमेर जिले में
80 से 150 फीट तक सीमा पर रेत के टीलों की ऊंचाई