30 सितंबर 2026,

बुधवार

Patrika Logo
home_icon

होम

इनस्टॉल ऐप

ई-पेपर

video_icon

शॉर्ट्स

profile_icon

प्रोफाइल

jaisalmer: एक कॉल पर जिंदगी बचाने दौड़ पड़ते हैं जैसलमेर के रक्तदाता

सीमांत शहर में रक्तदान अब महज शिविरों तक सीमित नहीं, जरूरत पर सक्रिय होने वाली आदत बन रहा है। अनजान मरीज, प्रसूता या आपात स्थिति में एक फोन और सोशल मीडिया संदेश रक्तदाताओं को अस्पताल तक पहुंचा रहा है। जन्मदिन, सालगिरह जैसे अवसरों पर भी युवा स्वेच्छा से जवाहिर चिकित्सालय के रक्त बैंक पहुंचकर रक्तदान कर रहे हैं।
2 min read
Google source verification
jaisalmer blood bank

जैसलमेर। राजकीय जवाहिर चिकित्सालय के ब्लड बैंक में कार्यरत कार्मिक।

जैसलमेर। सीमांत जैसलमेर में अब रक्तदान केवल शिविरों तक सीमित गतिविधि नहीं रहा। यहां एक ऐसी रक्तदाता पीढ़ी तैयार हो चुकी है, जो किसी अनजान मरीज के लिए भी बिना झिझक अस्पताल पहुंचती है। मरीज कौन है, उससे रिश्ता क्या है और जरूरत कितनी बड़ी है—इन सवालों से पहले एक ही बात सामने आती है... रक्त चाहिए तो पहुंचना है। जन्मदिन हो, शादी की सालगिरह हो या कोई यादगार अवसर, युवा स्वेच्छा से रक्तदान करने जवाहिर चिकित्सालय के रक्त बैंक पहुंचते हैं। किसी मरीज या प्रसूता के लिए अचानक रक्त की जरूरत पड़े तो सोशल मीडिया संदेश या एक फोन कॉल कई रक्तदाताओं को सक्रिय कर देता है। कई बार कुछ ही समय में रक्तदाता अस्पताल पहुंचकर रक्तदान कर देते हैं।

कभी चुनिंदा दाताओं के भरोसे था जैसलमेर

जवाहिर चिकित्सालय में रक्त बैंक की स्थापना 1996 में हुई थी। उस समय रक्त की व्यवस्था करना मरीज के परिवार के लिए बड़ी चुनौती हुआ करती थी। स्वैच्छिक रक्तदाताओं की संख्या कम थी और जरूरत पड़ने पर चिकित्साकर्मी उन्हीं चुनिंदा लोगों से संपर्क करते थे। रक्त लेने के बदले रक्त देने को लेकर भी लोगों में झिझक थी।

बीते वर्षों में यह तस्वीर बदली है। जागरूकता बढ़ी और सामाजिक संस्थाओं, संगठनों तथा व्यक्तिगत स्तर पर वर्षभर रक्तदान शिविर लगने लगे। इसके साथ ऐसे नियमित रक्तदाताओं का समूह बना, जो जरूरत के समय किसी पहचान के बिना भी रक्त देने के लिए तैयार रहता है।

500 नामों की सूची, जरूरत पर सक्रिय होता नेटवर्क

जिला अस्पताल के रक्त बैंक में करीब 500 स्वैच्छिक रक्तदाताओं के नाम और मोबाइल नंबर सूचीबद्ध हैं। जरूरत पड़ने पर इन्हें फोन किया जाता है। निगेटिव रक्त समूह की जरूरत होने पर भी संबंधित दाताओं से संपर्क किया जाता है और कई लोग अस्पताल पहुंचकर रक्तदान करते हैं।

इस बदलाव में अब महिलाएं और युवतियां भी भागीदार हैं। कई लोग नियमित रक्तदान करते हैं, लेकिन इसका प्रचार नहीं करते। जैसलमेर में ऐसे रक्तदाता भी हैं, जिन्होंने जीवन में 50 से अधिक बार रक्तदान किया है और जिला व राज्य स्तर पर सम्मानित हो चुके हैं।

रक्त बैंक में क्षमता 1000 यूनिट की

वरिष्ठ कार्मिक मंगेज सिंह के अनुसार रक्त बैंक में वर्तमान में करीब 200 यूनिट रक्त उपलब्ध है। यहां करीब 1000 यूनिट तक रक्त संग्रहण की क्षमता है। सामान्यत: पॉजिटिव रक्त समूह की उपलब्धता बनी रहती है। आवश्यकता पड़ने पर स्वैच्छिक रक्तदाताओं का नेटवर्क सक्रिय किया जाता है। उन्होंने बताया कि आगामी 2 और 5 अक्टूबर को सीमा सुरक्षा बल में रक्तदान शिविरों का आयोजन किया जा रहा है। दरअसल वर्षभर लगने वाले रक्तदान शिविर भी रक्त उपलब्धता बनाए रखने में अहम भूमिका निभाते हैं। किसी संस्था का स्थापना दिवस हो या सामाजिक आयोजन, कई संगठन ऐसे अवसरों को रक्तदान से जोड़ रहे हैं।

रक्तदान अब जरूरत नहीं, संस्कार बन रहा

जैसलमेर की इस बदलती तस्वीर की सबसे अहम बात रक्त बैंक में मौजूद यूनिट नहीं, बल्कि जरूरत पड़ते ही सक्रिय हो जाने वाला समाज है। कभी जहां एक बोतल रक्त के लिए परिवार को कई लोगों से संपर्क करना पड़ता था, वहां अब एक संदेश कई रक्तदाताओं तक पहुंचता है। रक्तदान की यह संस्कृति अस्पताल की जरूरत पूरी करने से आगे बढ़कर उस भरोसे को मजबूत कर रही है, जिसमें किसी अनजान मरीज की जिंदगी बचाने के लिए कोई अनजान व्यक्ति अपना रक्त देने पहुंच जाता है।'