
जैसलमेर. स्थानीय सवारी को किले आने-जाने के लिए ऑटो मिलना नहीं है आसान।
जैसलमेर. ऐतिहासिक सोनार किले में तिपहिया वाहनों के संचालन को लेकर नियमों की अनदेखी के आरोप सामने आ रहे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि जिम्मेदारों की निगरानी के बावजूद किले में तिपहिया वाहन बेरोकटोक संचालित हो रहे हैं। सबसे बड़ी शिकायत यह है कि स्थानीय सवारियों के लिए ऑटो चालक आनाकानी करते हैं, जबकि देशी-विदेशी पर्यटकों को सवारी मिलना आसान है। स्थानीय लोगों के अनुसार दशहरा चौक से किले के नीचे जाने के लिए स्थानीय सवारी ऑटो तलाशती रह जाती है। अखे प्रोल से किले के भीतर जाने में भी कई बार स्थानीय यात्रियों को वाहन नहीं मिलते। आरोप है कि ऑटो चालकों की नजर स्थानीय सवारी के बजाय पर्यटकों पर रहती है। पर्यटक मिलते ही उन्हें किले के भीतर या बाहर ले जाने के लिए चालक तैयार हो जाते हैं।
दिन के समय स्थानीय लोग किसी तरह पैदल आवाजाही कर लेते हैं, लेकिन रात में समस्या ज्यादा गंभीर हो जाती है। रेलवे स्टेशन या बस स्टैंड से किले तक आने वाले परिवारों को ऑटो नहीं मिलने की शिकायत है। खासकर महिला, बच्चे और बुजुर्ग साथ हों तो परेशानी बढ़ जाती है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि प्रतिबंधित समय के बाद किले के भीतर या किले के नीचे जाने के लिए जरूरतमंद सवारियों को कई चालक बैठाने से साफ मना कर देते हैं। ऐसे में परिवारों को सामान के साथ किले की चढ़ाई और संकरी गलियों से पैदल गुजरना पड़ता है।
सोनार किले में तिपहिया वाहनों की आवाजाही जिम्मेदार विभागों की नजर से छिपी नहीं है। इसके बावजूद यदि स्थानीय लोगों की शिकायत सही है तो सवाल निगरानी व्यवस्था पर उठना स्वाभाविक है। किले में वाहनों के संचालन को लेकर निर्धारित समय और नियम हैं तो उनकी पालना सभी सवारियों और वाहन चालकों पर समान रूप से लागू होनी चाहिए। मामला केवल यातायात व्यवस्था का नहीं है। सोनार किले के भीतर बड़ी संख्या में स्थानीय परिवार रहते हैं और उनकी रोजमर्रा की आवाजाही भी होती है। ऐसे में पर्यटकों की सुविधा और स्थानीय लोगों की जरूरत के बीच संतुलित व्यवस्था जरूरी है। स्थानीय लोगों की मांग है कि किले में तिपहिया वाहनों के संचालन की वास्तविक स्थिति की जांच कर नियमों की पालना सुनिश्चित कराई जाए।
दशहरा चौक से नीचे जाने के लिए स्थानीय व्यक्ति ऑटो मांगता है तो कई चालक सीधे मना कर देते हैं। पर्यटक आते ही वही ऑटो चालक तुरंत तैयार हो जाते हैं।
— महेशदान, स्थानीय निवासी
स्टेशन या बस स्टैंड से रात में किले तक पहुंचना मुश्किल हो जाता है। परिवार में महिला, बच्चे या बुजुर्ग हों तो ऑटो नहीं मिलने पर परेशानी काफी बढ़ जाती है।
— रेखा, स्थानीय निवासी
सोनार किले में पर्यटकों के साथ स्थानीय निवासियों की सुविधा का भी ध्यान रखा जाना चाहिए। वाहनों के संचालन का समय और मार्ग स्पष्ट होने से व्यवस्था बेहतर हो सकती है।
— सुरेंद्रसिंह, व्यवसायी
Updated on:
29 Sept 2026 07:40 pm
Published on:
29 Sept 2026 07:40 pm
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