
अखे प्रोल से हवा प्रोल तक वाहनों की आवाजाही
जैसलमेर। ऐतिहासिक सोनार किले की पहचान उसकी पीली पत्थर की प्राचीरों के साथ संकरी और घुमावदार घाटियों से भी है। इसी विरासत के बीच यातायात नियमों की अनदेखी अब रोजमर्रा की परेशानी बनती जा रही है। सुबह 8 से दोपहर 2 बजे तक तिपहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक के बावजूद अखे प्रोल से हवा प्रोल तक थ्रीव्हीलरों की आवाजाही बनी हुई है। संकरी गलियों में वाहन और पैदल राहगीर आमने-सामने आते हैं तो रास्ता तलाशना मुश्किल हो जाता है। सुबह का समय किले के लिए सबसे व्यस्त रहता है। विद्यार्थी स्कूल जाते हैं। लक्ष्मीनाथ मंदिर, जैन मंदिर और बाबा रामदेव मंदिर जाने वाले दर्शनार्थियों की आवाजाही रहती है। पर्यटक भी किले की गलियों में भ्रमण करते हैं। इसी दौरान प्रतिबंधित समय में थ्रीव्हीलरों की आवाजाही व्यवस्था पर सवाल खड़े करती है। कई जगह वाहन मोड़ने और निकालने के दौरान पैदल राहगीरों को रुकना पड़ता है। स्थानीय लोगों के अनुसार पहले भी वाहनों की आवाजाही के बीच हादसे की स्थिति बन चुकी है। किले की घाटियां सामान्य सड़क की तरह चौड़ी नहीं हैं। यहां पैदल आवाजाही, स्थानीय निवासियों की जरूरतें और पर्यटन गतिविधियां एक ही रास्ते पर चलती हैं। ऐसे में तय समय में वाहनों पर रोक का उद्देश्य पैदल राहगीरों को सुरक्षित और सुगम रास्ता उपलब्ध कराना है। लेकिन मौके की स्थिति बताती है कि नियम लागू करने की नियमित व्यवस्था कमजोर पड़ रही है।
दशहरा चौक और आसपास का क्षेत्र किले के भीतर आवाजाही का महत्वपूर्ण हिस्सा है। यहां वाहन आने पर संकरी सड़क पर पैदल राहगीरों के लिए जगह कम हो जाती है। खासकर सुबह के समय विद्यार्थियों और मंदिरों की ओर जाने वाले लोगों की आवाजाही के बीच यातायात दबाव बढ़ जाता है। स्थानीय लोगों का कहना है कि केवल नियम तय करना पर्याप्त नहीं, प्रतिबंधित समय में उनकी निगरानी भी जरूरी है।
पर्यटन सीजन के दौरान किले में पर्यटकों की आवाजाही बढ़ती है। ऐसे में मौजूदा यातायात व्यवस्था के साथ वाहनों की संख्या बढ़ने पर संकरी घाटियों में दबाव और बढ़ सकता है। करीब 870 वर्ष पुराने सोनार किले में तीन हजार से अधिक आबादी निवास करती है। किले में करीब एक दर्जन प्रमुख पर्यटन स्थल हैं। नगर परिषद क्षेत्र में किला दो वार्डों में विभाजित है और 50 से अधिक व्यावसायिक प्रतिष्ठान संचालित होते हैं।
यहां चुनौती केवल यातायात की नहीं है। किले में रहने वाली आबादी, कारोबार और पर्यटन—तीनों की जरूरतों के बीच संतुलन बनाना भी जरूरी है। प्रतिबंधित समय में थ्रीव्हीलरों की आवाजाही पर प्रभावी रोक, प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी और नियम तोड़ने वालों पर कार्रवाई से व्यवस्था को बेहतर किया जा सकता है।
सुबह विद्यार्थियों, दर्शनार्थियों और पर्यटकों की आवाजाही रहती है। इसी समय थ्रीव्हीलर संकरी गलियों में आते-जाते हैं। वाहन सामने आने पर पैदल राहगीरों को रुककर रास्ता देना पड़ता है। किले में प्रतिबंधित समय के नियम स्पष्ट हैं, इसलिए उनकी नियमित निगरानी और पालन जरूरी है, ताकि किसी अप्रिय स्थिति से बचा जा सके।
-रमेश , स्थानीय निवासी
दशहरा चौक पर साफ दिखाई देता है वाहनों का दबाव
दशहरा चौक और आसपास की गलियां पहले से संकरी हैं। सुबह वाहनों की आवाजाही बढ़ने पर दुकान तक पहुंचने वाले ग्राहक और पैदल राहगीर दोनों प्रभावित होते हैं। यदि प्रतिबंधित समय में वाहनों की आवाजाही पर निगरानी रहे और नियम समान रूप से लागू हों तो किले में आवागमन अधिक व्यवस्थित हो सकता है और लोगों को राहत मिलेगी।
-मोहनसिंह भाटी, स्थानीय निवासी
सोनार किले में स्थानीय लोगों के साथ रोज पर्यटक भी घूमते हैं। संकरी गलियों में वाहन आने पर दोनों के लिए जगह कम पड़ती है। पर्यटन सीजन शुरू होने से पहले व्यवस्था पर ध्यान दिया जाना जरूरी है। प्रवेश बिंदुओं पर निगरानी बढ़े और तय समय का पालन हो तो राहगीरों की परेशानी काफी कम हो सकती है।”
नियम स्पष्ट हों तो सभी के लिए सुविधा
- कविता, स्थानीय निवासी
- 870 वर्ष — सोनार किले का इतिहास
- 3 हजार से अधिक — किले में निवास करने वाली आबादी
- करीब 1 दर्जन — प्रमुख पर्यटन स्थल
- 2 वार्ड — नगर परिषद क्षेत्र में किले का विभाजन
- 50 से अधिक — किले में संचालित व्यावसायिक प्रतिष्ठान
- सुबह 8 से दोपहर 2 बजे — तिपहिया वाहनों की आवाजाही पर रोक का समय
- अखे प्रोल से हवा प्रोल तक — प्रमुख प्रभावित आवाजाही क्षेत्र
- 3 प्रमुख मंदिर — लक्ष्मीनाथ, जैन मंदिर और बाबा रामदेव मंदिर
- 1 प्रमुख चिंता — प्रतिबंधित समय में थ्रीव्हीलरों की आवाजाही से पैदल राहगीरों पर बढ़ता दबाव
Updated on:
28 Sept 2026 08:51 pm
Published on:
28 Sept 2026 08:51 pm
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