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जैसलमेर. सुनहरी रेत और लोकसंस्कृति की पहचान रखने वाले जैसलमेर में मानसिक स्वास्थ्य अब एक गंभीर सार्वजनिक चुनौती के रूप में सामने आ रहा है। मनोरोग संबंधी समस्याओं के उपचार के लिए अस्पताल पहुंचने वाले लोगों की संख्या में पिछले कुछ वर्षों के दौरान उल्लेखनीय बढ़ोतरी बताई जा रही है। वर्ष 2018 में करीब दो हजार मरीज उपचार ले रहे थे। यह संख्या 2020 में पांच हजार और 2021-22 में 7,200 तक पहुंच गई। वर्ष 2026 में उपचार लेने वाले मरीजों का आंकड़ा दस हजार से अधिक बताया जा रहा है। विशेषज्ञों का अनुमान है कि वास्तविक जरूरतमंदों की संख्या इससे काफी अधिक हो सकती है।
कोरोना महामारी के बाद मानसिक स्वास्थ्य को लेकर चिंता बढ़ी है। बेरोजगारी, आर्थिक असुरक्षा, पारिवारिक तनाव, नशे की प्रवृत्ति और भविष्य को लेकर अनिश्चितता लोगों की मानसिक स्थिति को प्रभावित कर सकती है। युवा भी इस चुनौती से अछूते नहीं हैं। समस्या केवल बीमारी की पहचान तक सीमित नहीं है। सामाजिक झिझक, जानकारी का अभाव और विशेषज्ञों तक पहुंच की कठिनाई लोगों को समय पर मदद लेने से रोक सकती है।
मानसिक स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं में शुरुआती संकेतों को समझना महत्वपूर्ण है। लगातार उदासी, नींद में बदलाव, सामाजिक मेलजोल से दूरी या रोजमर्रा के कामों में रुचि कम होना मदद लेने की जरूरत का संकेत हो सकता है। हालांकि, इन लक्षणों के आधार पर स्वयं किसी बीमारी का निष्कर्ष नहीं निकालना चाहिए। विशेषज्ञ से परामर्श ही उचित रास्ता है। ग्रामीण क्षेत्रों में सेवाओं की सीमित उपलब्धता और सामाजिक संकोच इस रास्ते को कठिन बना सकते हैं।
मोबाइल और इंटरनेट का अत्यधिक इस्तेमाल भी चिंता का विषय है। स्क्रीन पर बढ़ता समय नींद, पढ़ाई, शारीरिक गतिविधियों और आमने-सामने के संवाद को प्रभावित कर सकता है। किशोरों के लिए डिजिटल इस्तेमाल और वास्तविक सामाजिक जीवन के बीच संतुलन जरूरी है। परिवार बच्चों के व्यवहार, दिनचर्या और भावनात्मक बदलावों पर ध्यान देकर समय रहते सहयोग कर सकते हैं।
- 2018 : में करीब 2,000 मरीज उपचार के लिए पहुंचे
- 2020 : आंकड़ा बढ़कर करीब 5,000 हुआ
- 2021-22 : उपचार लेने वाले मरीजों की संख्या 7,200 बताई गई
- 2026 : उपचार लेने वाले मरीज दस हजार से अधिक होने का अनुमान
मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाए रखने में उपचार के साथ संतुलित जीवनशैली की भूमिका भी महत्वपूर्ण है। नियमित व्यायाम, योग, ध्यान, पर्याप्त नींद और परिवार के साथ संवाद लाभकारी हो सकते हैं। मानसिक परेशानी को छिपाने या केवल इच्छाशक्ति की कमी मानने के बजाय जरूरत पड़ने पर विशेषज्ञ की मदद लेनी चाहिए।
-डॉ. रामसिंह यादव, मनोरोग विशेषज्ञ, राजकीय जवाहिर अस्पताल, जैसलमेर
Updated on:
09 Oct 2026 08:28 pm
Published on:
09 Oct 2026 08:28 pm
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