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JAISALMER NEWS- नृसिंह चतुर्दशी पर हुआ कुछ ऐसा कि देखने उमड़ पड़े…

नृसिंह भगवान की झांकी में उमड़ा जनसैलाब
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जैसलमेर

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Jitendra Kumar Changani

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Updated: 29 Apr 2018, 10:47 PM IST

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हर्षोल्लास के साथ मनाई नृसिंह जयंती
पोकरण(जैसलमेर). कस्बे में नृसिंह चतुर्दशी का पर्व परंपरागत रूप से मनाया गया। इस दौरान कस्बे में नृसिंह भगवान की झांकी व शोभायात्रा निकाली गई। जिसमें सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने भाग लिया। अन्याय व अत्याचार पर न्याय व सत्यता की जीत के प्रतीक नृसिंह जयंती के अवसर पर कस्बे में प्रतिवर्ष की भांति इस वर्ष भी सोनारों का बास स्थित भूरालाल सोनी के आवास से शाम करीब साढ़े छह बजे नृसिंह भगवान की पंडित अशोक शर्मा के सानिध्य में मुख्य यजमान कालूराम सोनी ने अभिषेक व षोड्षोपचार विधि से पूजा-अर्चना की गई। इस अवसर पर विष्णु सहस्त्रनाम व गीता के पुरुषसुक्त अध्याय का पाठ किया गया। उसके पश्चात् भगवान विष्णु के नृसिंह अवतार की झांकी निकाली गई। इस झांकी के आगे हिरण्यकश्यप के किरदार में जगदीश शर्मा हाथ में हंटर लिए हुए उत्पात मचाने का अभिनय करते हुए चल रहा था तथा नृसिंह भगवान के रूप में रामाकिशन शर्मा व भक्त शिरोमणी प्रहलाद के रूप में मनोज शर्मा शोभायात्रा के साथ चल रहे थे। सैंकड़ों की संख्या में श्रद्धालुओं ने जयकारों के साथ शोभायात्रा में भाग लिया। यह झांकी सदर बाजार से होती हुई स्थानीय चारभुजा मंदिर पहुंची।

IMAGE CREDIT: patrika

हिरण्यकश्यप के वध के साथ संपन्न हुआ कार्यक्रम
पौराणिक मान्यताओं के अनुसार हिरण्यकश्यप के अत्याचारों से आमजन को मुक्ति दिलाने के लिए विष्णु भगवान ने नृसिंह अवतार लिया। उन्होंने भक्त प्रहलाद की भक्ति से प्रसन्न होकर हिरण्यकश्यप का वध किया। इसी उपलक्ष्य पर प्रतिवर्ष नृसिंह चतुर्दशी का पर्व मनाया जाता है। शनिवार को भी यह पर्व हर्षोल्लास के साथ मनाया गया। शोभायात्रा सोनारों की गली से रवाना हुई तथा सदर बाजार होते हुए चारभुजा मंदिर पहुंची। यहां सूर्यास्त से पूर्व साढे सात बजे चारभुजा मंदिर की चौखट पर हिरण्यकश्यप का वध किया गया तथा वध कार्यक्रम के पश्चात् भक्त प्रहलाद की जय जयकार के साथ मंदिर में पुजारी के सानिध्य में आरती की गई तथा प्रसाद का वितरण किया गया।
झांकी का जगह-जगह स्वागत
नृसिंह भगवान व भक्त प्रहलाद की झांकी का बाजार में लोगों ने गुलाल व अबीर डालकर स्वागत किया तथा नृसिंह भगवान व प्रहालद के जयकारे लगाए गए। युवक युवतियां नाचते गाते झांकी में चल रहे थे। झांकी के दौरान बाजार में मेले जैसा माहौल हो गया। पूरा वातावरण गोविंद जय-जय, गोपाल जय-जय के नारों से गूंजायमान हो रहा था।