
जैसलमेर. शहर में पर्यटकों को परेशान करने ऐसी तस्वीरें अब आम हो चली हैं।
जैसलमेर. स्वर्णनगरी की सुनहरी चमक के बीच पर्यटकों को परेशान करने वाली तस्वीर भी लगातार सामने आ रही है। शहर के प्रमुख पर्यटन स्थलों और चौराहों पर सक्रिय लपका गिरोह और भिक्षावृत्ति से जुड़े लोग पर्यटकों के लिए परेशानी का सबब बनते जा रहे हैं। पर्यटकों को घेरकर बार-बार सेवाएं लेने के लिए दबाव बनाना, पीछा करना और भिक्षावृत्ति के नाम पर लगातार रुपए मांगना अब पर्यटन नगरी की छवि पर सवाल खड़े कर रहा है। जैसलमेर आने वाला पर्यटक सोनार दुर्ग, गड़ीसर सरोवर, पटवा हवेलियों सहित अन्य पर्यटन स्थलों की खूबसूरती देखने पहुंचता है, लेकिन उसे इन स्थलों के आसपास ऐसी भीड़ का सामना करना पड़ता है, जो उसकी यात्रा का अनुभव खराब कर देती है। पर्यटक के वाहन से उतरते ही उसे घेरने वाले लोग कभी गाइड, कभी टैक्सी, कभी होटल और कभी अन्य पर्यटन गतिविधियों के नाम पर सेवाएं लेने के लिए दबाव बनाते हैं। मना करने के बाद भी पीछा करने और बार-बार आग्रह करने की शिकायतें सामने आती रहती हैं।
भिक्षावृत्ति भी पर्यटन स्थलों के आसपास गंभीर समस्या बनती जा रही है। पर्यटकों से छोटे बच्चों, महिलाओं और अन्य लोगों की ओर से लगातार रुपए मांगने की शिकायतें हैं। कई बार एक व्यक्ति के रुपए देने के बाद दूसरे लोग भी पैसे मांगने लगते हैं। इससे पर्यटक असहज हो जाते हैं। विदेशी पर्यटकों को देखकर भी इस तरह की गतिविधियां बढऩे की शिकायतें मिलती हैं।
लपका गिरोह की सक्रियता केवल एक-दो स्थानों तक सीमित नहीं है। शहर के प्रमुख चौराहों, पर्यटन स्थलों और पर्यटकों की आवाजाही वाले क्षेत्रों में ऐसे लोग आसानी से नजर आ जाते हैं। पर्यटन सीजन में इनकी सक्रियता और बढ़ जाती है। पर्यटकों को अपने साथ ले जाने अथवा किसी विशेष सेवा के लिए राजी करने की होड़ में कई बार आपसी विवाद की स्थिति भी बनती है।
जैसलमेर की अर्थव्यवस्था में पर्यटन की अहम भूमिका है। देश-विदेश से आने वाला पर्यटक यहां सिर्फ ऐतिहासिक इमारतें और रेगिस्तान देखने नहीं आता, बल्कि शहर की मेहमाननवाजी का अनुभव भी लेकर जाता है। ऐसे में चंद लोगों की लगातार परेशान करने वाली गतिविधियां पूरे शहर की छवि को प्रभावित कर सकती हैं।
पर्यटन से जुड़े लोगों का कहना है कि लपका गतिविधियों और सार्वजनिक स्थानों पर जबरन पैसे मांगने की प्रवृत्ति पर प्रभावी अंकुश जरूरी है।
जैसलमेर के प्रमुख पर्यटन स्थलों पर निगरानी बढ़ाने के साथ इन तत्वों पर नियमित कार्रवाई हो तो समस्या पर काफी हद तक नियंत्रण पाया जा सकता है। स्वर्णनगरी की पहचान उसकी विरासत और मेहमाननवाजी है, उसे धूमिल नहीं होने दिया जाना चाहिए।
- विमल गोपा, पर्यटन व्यवसायी
Updated on:
07 Oct 2026 08:57 pm
Published on:
07 Oct 2026 08:57 pm
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