एक दिन के बादशाह बनने का गौरव पुष्करणा समाज के व्यास जाति के विवाहित व्यक्ति को ही मिलता है। जैसलमेर में होली की यह परंपरा, अन्य स्थानों की होली से कुछ अलग बनाती है। वर्षों से इस परंपरा का निर्वहन आज भी किया जाता है। होली के मस्तीमय व उल्लास से परिपूर्ण माहौल में गुलाल, अबीर उड़ाते और होली के उन्माद में मचलते व तबले की थाप पर थिरकते बच्चे, युवा और बुजुर्ग बादशाह के दरबार में शामिल होते हैं और उसके बाद निकाली जाने वाली सवारी में भी फाग गीत गाते हुए साथ चलते हैं। यह नजारा देखने दूर-दराज से लोग आते हैं।