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jaisalmer: नाचना में अकाल की मार, पानी-चारे का संकट और बदहाल व्यवस्थाएं बने चुनावी मुद्दे

नाचना ग्राम पंचायत में अकाल, पेयजल संकट और चारे की कमी से ग्रामीणों की मुश्किलें बढ़ गई हैं। करीब दस हजार की आबादी वाले गांव में सफाई, बरसाती पानी की निकासी और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार की मांग उठ रही है। पंचायती राज चुनाव के बीच ग्रामीणों की नजरें बुनियादी समस्याओं के समाधान और जनप्रतिनिधियों की जवाबदेही पर टिकी हैं।
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जैसलमेर

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Deepak Vyas

•

Updated: 28 Oct 2026, 8:14 PM IST

nachna news

नाचना में अकाल की मार, पेयजल संकट और पशुचारे की कमी से ग्रामीण व पशुपालक परेशान।

नाचना. अकाल की मार, पेयजल संकट, पशुओं के लिए चारे की कमी और बदहाल सफाई व्यवस्था। सीमावर्ती पोकरण विधानसभा क्षेत्र की ग्राम पंचायत नाचना में पंचायती राज चुनाव के बीच बुनियादी सुविधाओं का मुद्दा प्रमुखता से उठ रहा है। करीब दस हजार की आबादी और 5700 मतदाताओं वाली इस ग्राम पंचायत में ग्रामीण लंबे समय से पेयजल आपूर्ति, बरसाती पानी की निकासी और चिकित्सा सुविधाओं में सुधार की मांग कर रहे हैं। इस बार अकाल की स्थिति ने पशुपालकों की मुश्किलें और बढ़ा दी हैं। ग्रामीणों की अपेक्षा है कि चुनावी वादों के साथ इन समस्याओं के समाधान पर भी गंभीरता दिखाई जाए।

घर-घर नल कनेक्शन, फिर भी नियमित पानी का इंतजार

जल जीवन मिशन के तहत गांव में घर-घर पाइपलाइन बिछाकर पेयजल कनेक्शन दिए गए हैं, लेकिन ग्रामीणों के अनुसार नियमित जलापूर्ति अब भी बड़ी समस्या है। इंदिरा गांधी नहर के नजदीक होने के बावजूद कई परिवारों को लंबे अंतराल पर पानी मिलता है। कुछ घरों में महीने में एक बार पानी पहुंचने की शिकायत है। ऐसे में परिवारों को जरूरत पूरी करने के लिए महंगे दामों पर निजी टैंकरों से पानी खरीदना पड़ता है। ग्रामीण नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने और समस्या का स्थायी समाधान करने की मांग कर रहे हैं।

अकाल में पशुपालन पर संकट, चारे के लिए भटक रहे पशुपालक

नाचना क्षेत्र में बड़ी आबादी की आजीविका पशुपालन पर निर्भर है। अकाल के कारण खेतों में फसलें खराब होने से पशुओं के लिए चारे की उपलब्धता प्रभावित हुई है। पशुपालकों के सामने अब पशुओं का पेट भरने और पानी की व्यवस्था करने की चुनौती है। ग्रामीणों की मांग है कि पशुओं के लिए चारा डिपो खोले जाएं, ताकि संकट के इस दौर में राहत मिल सके। चारे की कमी और बढ़ते खर्च का सीधा असर पशुपालकों की आजीविका पर पड़ रहा है।

मुख्य बाजार में जलभराव, सफाई और दमकल सुविधा का अभाव

नाचना के मुख्य बाजार में बरसाती पानी की निकासी की समुचित व्यवस्था नहीं होने से बारिश के दिनों में परेशानी बढ़ जाती है। शिव मार्केट, चांडक मार्केट और बस स्टैंड क्षेत्र में पानी जमा होने से कीचड़ फैलता है और आवाजाही प्रभावित होती है। सफाई व्यवस्था की समस्या भी ग्रामीणों के लिए चिंता का विषय है। दूसरी ओर, क्षेत्र में आग लगने की घटनाओं के बावजूद स्थानीय स्तर पर दमकल सुविधा उपलब्ध नहीं है। आग लगने पर पोकरण या जिला मुख्यालय से दमकल पहुंचने तक वनस्पति और संपत्ति को नुकसान होने का खतरा बना रहता है।

चुनावी मुकाबले के बीच विकास की उम्मीदें

ग्राम पंचायत नाचना जिला परिषद के वार्ड संख्या 20 में आती है, जहां सदस्य पद अनुसूचित जाति के लिए आरक्षित है। इस वार्ड में भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशी चुनाव मैदान में हैं। पंचायत समिति नाचना के वार्ड संख्या 11 में ओबीसी महिला और वार्ड संख्या 10 में अनुसूचित जाति के लिए सीट आरक्षित है। सरपंच पद सामान्य श्रेणी में होने से कई दावेदार सक्रिय हैं। गांव में राजपूत, मेघवाल, मुस्लिम, सोनी, सेन, भार्गव और भील सहित विभिन्न सामाजिक वर्गों की आबादी है। चुनावी सरगर्मी के बीच ग्रामीणों की अपेक्षा है कि निर्वाचित प्रतिनिधि पेयजल, पशुचारे, सफाई, जल निकासी और चिकित्सा सुविधाओं से जुड़ी समस्याओं को प्राथमिकता दें।

ये हैं ग्रामीणों की प्रमुख मांगें

- नियमित पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित हो।

- पशुओं के लिए चारा डिपो खोले जाएं।

- मुख्य बाजार में जल निकासी और सफाई व्यवस्था सुधरे।

- स्थानीय स्तर पर दमकल सुविधा उपलब्ध हो।

- अस्पताल में चिकित्सकों की कमी दूर हो।