
Senior Citizens Day: 50 से भी ज्यादा मेडल जितने वाले 80 वर्षीय सरदार सिंह चौहान (फोटो सोर्स- Patrika)
Senior Citizens Day: उम्र के जिस पड़ाव पर पहुंचकर अधिकांश लोग आराम को जिंदगी का हिस्सा मान लेते हैं, उसी उम्र में झाबुआ के 80 वर्षीय सेवानिवृत्त हेडमास्टर सरदार सिंह चौहान आज भी ट्रैक एंड फील्ड पर युवाओं को चुनौती देते नजर आते हैं। हाथ में भाला, सामने गोला और चक्का…और कदमों में वही जोश, जो किसी युवा खिलाड़ी को मैदान में उतरने के लिए प्रेरित करे। सरदार सिंह अब तक विभिन्न प्रतियोगिताओं में 50 से अधिक पदक अपने नाम कर चुके हैं। उनकी कहानी सिर्फ वरिष्ठ नागरिकों के लिए प्रेरणा नहीं, बल्कि मोबाइल और सोशल मीडिया की स्क्रीन में उलझती जेन जी के लिए भी एक सीधा संदेश है फिट रहना है तो मैदान से जुडि़ए, उम्र से नहीं।
सरदार सिंह चौहान केवल तैराकी में ही माहिर नहीं हैं, बल्कि डिस्क थ्रो, शॉट पुट और जैवलिन थ्रो जैसी ट्रैक एंड फील्ड स्पर्धाओं में भी लगातार हिस्सा लेते हैं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने आराम को अपना लक्ष्य बनाने के बजाय फिटनेस को जीवन का हिस्सा बनाया। उनके लिए मैदान सिर्फ पदक जीतने की जगह नहीं, बल्कि खुद को हर दिन बेहतर बनाने का माध्यम है। यही वजह है कि 80 की उम्र में भी उनकी सक्रियता और ऊर्जा उन्हें सामान्य दिनचर्या जीने वाले लोगों से अलग पहचान देती है।
उनकी हालिया उपलब्धि फरवरी 2026 में राजस्थान के अलवर में आयोजित सीनियर सिटीजन ओलंपिक में सामने आई। यहां उन्होंने अपनी उम्र को पीछे छोड़ते हुए शानदार प्रदर्शन किया और रजत तथा कांस्य पदक अपने नाम किए। राष्ट्रीय स्तर की इस प्रतियोगिता में उनकी फुर्ती, फिटनेस और मैदान के प्रति जुनून आयोजन में आकर्षण का केंद्र रहा। उन्होंने साबित किया कि शरीर उम्र के साथ बदल सकता है, लेकिन अगर इच्छाशक्ति और अनुशासन कायम रहे तो प्रदर्शन की क्षमता लंबे समय तक बरकरार रह सकती है।
शिक्षक और हेडमास्टर के रूप में वर्षों तक विद्यार्थियों को अनुशासन का पाठ पढ़ाने वाले सरदार सिंह आज अपने जीवन से उसी पाठ को साबित कर रहे हैं। उनका मानना है कि अनुशासन से बड़ा कोई गुरु नहीं। सेवानिवृत्ति के बाद उन्होंने अपनी फिटनेस को नया लक्ष्य बनाया। नियमित व्यायाम, खेल और सक्रिय दिनचर्या को जीवन में शामिल किया। वे कहते हैं कि बुढ़ापा कोई बीमारी नहीं, बल्कि जिंदगी का नया चरण है। उम्र बढऩे के साथ शरीर में बदलाव स्वाभाविक है, लेकिन नियमित शारीरिक गतिविधि व्यक्ति को मानसिक और शारीरिक रूप से सक्रिय बनाए रख सकती है।
आज की युवा पीढ़ी का बड़ा हिस्सा मोबाइल, सोशल मीडिया और वर्चुअल दुनिया में समय बिता रहा है। ऐसे दौर में सरदार सिंह चौहान का संदेश बेहद सीधा और जरूरी है, ‘मोबाइल छोड़ो, मैदान पकड़ो।’ उनका कहना है कि स्क्रीन पर घंटों समय बिताने के बजाय मैदान में पसीना बहाना शरीर और दिमाग दोनों के लिए बेहतर है। खेल केवल शरीर को मजबूत नहीं करता, बल्कि तनाव कम करता है, आत्मविश्वास बढ़ाता है और सकारात्मक सोच विकसित करता है।
सरदार सिंह का संदेश साफ है, रिटायरमेंट जिंदगी का विराम नहीं, अपने लिए जीने की नई शुरुआत है। मैदान में उतरिए, पसीना बहाइए और उम्र को सिर्फ एक संख्या साबित कर दीजिए।
Updated on:
21 Aug 2026 03:45 pm
Published on:
21 Aug 2026 03:45 pm
