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DM की डीपी लगाकर साइबर अपराध, लेखपाल से 20 हजार की ठगी

डीएम की डीपी लगाकर साइबर अपराधियों ने लेखपाल से की 20 हजार की ठगी। बीते साल भी साइबर अपराधियों ने डीएम की डीपी लगाकर उप नियन्त्रक से ठगे थे 70 हजार रुपये। लेखपाल ने डीएम समझकर साइबर फ्रॉड से कई बार की चैट और दे दिए 20 हजार रुपये।
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Cyber crime

इस तस्वीर को सोशल मीडिया से लिया गया है।

लेखपाल से 20 हजार रुपए ठगी का मामला सामने आया है। क्या आम और क्या खास साइबर साइबर अपराधी किसी को भी अपनी ठगी का शिकार बनाने से नहीं चूक रहे हैं। ठगी का ताजा मामला झांसी जिले के जिलाधिकारी के नाम पर हुआ है। यहां साइबर फ्रॉड ने जिलाधिकारी के नाम से वाट्सएप प्रोफाइल बनाकर लेखपाल को 20 हजार रुपये का चूना लगा दिया है। कई दिन बाद जब मामले से पर्दा उठा तब लेखपाल ने शिकायती पत्र देकर अज्ञात के खिलाफ साइबर अपराध की वेबसाइट पर मामला दर्ज कराया है। इससे पहले बीते साल पूर्व जिलाधिकारी रविन्द्र कुमार की फोटो का इस्तेमाल कर फ्रॉड ने उप नियंत्रक नागरिक सुरक्षा से भी 70 हजार की ठगी कर ली थी।


देवरिया में तैनात है लेखपाल

मोठ के रहने वाले लेखपाल अर्जुन नलवंशी देवरिया में लेखपाल हैं। साइबर अपराध की नेशनल वेबसाइट पर उन्होंने शिकायत करते हुए बताया कि 18 अक्टूबर की शाम को एक अज्ञात नम्बर से उन्हें वाट्सएप पर मैसेज आया था। जब उन्होंने मैसेज भेजने वाले व्यक्ति की वॉट्सऐप प्रोफाइल देखी तो उसमें जिलाधिकारी झांसी की फोटो लगी हुई थी और साथ ही डीएम के नाम से ही अकाउंट बना था। लेखपाल ने सोचा कि जिलाधिकारी ने उन्हें मैसेज किया है। इसके बाद उत्साह के चलते वह उक्त फ्रॉड से वाट्सएप पर चैट करने लगे।


खरीद के दे दिए ई-कार्ड

इसी दौरान फ्रॉड ने उनसे शॉपिंग के लिए ई-कार्ड की मांग कर दी, जिसके बाद उन्होंने शॉपिंग वेबसाइट के 20 हजार रुपये के ई-कार्ड खरीद के दे दिए। बताया जा रहा है कि फ्रॉड ने ई-कार्ड से 20 हजार रुपये की शॉपिंग कर ली। बीते दिनों लेखपाल झांसी आए तो पता चला कि डीएम झांसी ने ऐसा कोई अकाउंट नहीं बनाया है। इसके बाद लेखपाल ने मामले में और अधिक जानकारी की तो मालूम हुआ कि उनके साथ साइबर फ्रॉड हो गया है।


अधिकारी के नाम पर मांगे पैसा तो समझे साइबर फ्रॉड है

पूरे मामले की जानकारी देते हुए एसपी सिटी ज्ञानेंद्र कुमार सिंह बताते हैं कि ऐसा कभी नहीं होता कि कोई अधिकारी किसी से पैसे की मांग करे। यदि कोई अधिकारी के नाम पर पैसा मांगता है तो समझ लें कि वह साइबर फ्रॉड है। यह लोग इंटरनेट से अधिकारियों की फोटो चोरी कर ऐसा करते हैं।