28 जनवरी 2026,

बुधवार

Patrika LogoSwitch to English
icon

मेरी खबर

video_icon

शॉर्ट्स

epaper_icon

ई-पेपर

सावधान! कहीं सेहत न बिगाड़ दे यह प्लांट का पानी

नलों में से टपकने वाला पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण जिले में साफ पानी की सप्लाई के नाम पर बड़ा कारोबार चल रहा है। घर, दफ्तर या दुकान, कहीं कैंपर भरवाए जा रहे हैं तो कहीं सीधे टंकी से बर्तनों में पानी भरवाया जा रहा है। लेकिन इनकी कोई जांच नहीं हो रही।

2 min read
Google source verification
सावधान! कहीं सेहत न बिगाड़ दे यह प्लांट का पानी

सावधान! कहीं सेहत न बिगाड़ दे यह प्लांट का पानी

झुंझुनूं. नलों में से टपकने वाला पानी पीने योग्य नहीं होने के कारण जिले में साफ पानी की सप्लाई के नाम पर बड़ा कारोबार चल रहा है। घर, दफ्तर या दुकान, कहीं कैंपर भरवाए जा रहे हैं तो कहीं सीधे टंकी से बर्तनों में पानी भरवाया जा रहा है। इसके चलते जिले में सैकड़ों प्लांट रोजाना लाखों लीटर पानी जमीन से खींच रहे हैं। अकेले झुंझुनूं शहर में 50 से अधिक प्लांट के जरिए करीब डेढ़ लाख लीटर पानी रोजाना घरों और दुकानों में सप्लाई किया जा रहा है। यह पानी हालांकि आरओ फिल्टर प्लांट से साफ करके सप्लाई का दावा किया जाता है। लेकिन इनकी कोई जांच नहीं हो रही। ऐसे में प्लांट से आने वाले इस पानी की गुणवत्ता पर भी सवाल खड़े हो रहे हैं।

जांच नहीं हो रही, पहली बार लिया सैंपल

झुंझुनूं में संचालित वाटर प्लांट के पानी की कहीं कोई जांच नहीं हो रही है। खाद्य सुरक्षा अधिकारी ने पहली बार झुंझुनूं शहर में दो जगह से तीन सैंपल लिए हैं, इसकी रिपोर्ट आना अभी बाकी है। खास बात यह है कि जो सैंपल लिया गया है, वहां थोड़ी बहुत क्वालिटी मेंटेन की जा रही है। अन्य स्थानों पर सैंपल लिए जाते तो दूध का दूध और पानी का पानी हो जाता। कितने लोगों ने लाइसेंस ले रखा है और कितनों ने नहीं, इसका भी विभाग के पास कोई जवाब नहीं है।

फ्लोराइड युक्त पानी के कारण मंगवा रहे कैम्पर

जिले में घरों में सप्लाई होने वाले पानी में फ्लोराइड की मात्रा अधिक होने के कारण लोग कैम्पर या फिल्टर पानी मंगवाना पसंद कर रहे हैं। खास बात यह है कि जलदाय विभाग सहित सरकारी कार्यालयों में भी कैम्पर का पानी काम में लिया जा रहा है।

शहर घर/दुकान कैम्पर लीटर

झुंझुनूं 40000 10000 150000

गुढ़ागौड़जी 2800 1000 20000

मलसीसर 4800 3000 60000

बिसाऊ 2500 1200 18000

बुहाना 2100 1000 15000

खेतड़ीनगर 5200 3500 70000

नवलगढ़ 19500 3000 60000

पिलानी 12950 3600 72000

सिंघाना 6500 —— 60000

उदयपुरवाटी 4700 800 12000

खेतड़ी 3420 2000 40000

सूरजगढ़ 4000 2500 37500

अलसीसर 1320 900 13500

चिड़ावा 16200 3500 52500

: जिले में संचालित वाटर प्लांट के पानी की जांच हो रही है या नही?

जवाब : पहले प्रावधान नहीं था, पिछले दो महीने से ही सिस्टम में आया है।

: अब तक कितने सैंपल लिए गए हैं?

जवाब : झुंझुनूं शहर में दो जगह से तीन सैंपल लिए गए हैं?

: सैंपल लिए गए, उनकी क्या रिपोर्ट आई है?

जवाब : अभी रिपोर्ट आई नहीं, दस दिन पहले ही सैंपल लिए हैं?

: दो महीने में इतने कम सैंपल क्यों?

जवाब : पानी का सैंपल लेना थोड़ा टेढ़ा काम है, अभी शुरुआत की है।

: गुणवत्ता के पैरामीटर क्या है?

जवाब : वो अभी हमारे पास नहीं आए, जांच रिपोर्ट आने पर ही पता चलेगा।

: कितने लोगों को लाइसेंस जारी कर रखे हैं, कितने अवैध है?

संबंधित खबरें

जवाब : यह तो नहीं बता सकते, लेकिन दो जगह से सैंपल लिए, उनके पास लाइसेंस हैं।

15 से 20 लीटर का कैम्पर

सरकारी विभागों में भी मंगवा रहे कैम्पर

एक्सपर्ट व्यू

प्लांट से आने वाले पानी की सही ढंग से मॉनेटरिंग नहीं हो रही है। नहरी पानी और भूजल के पानी को फिल्टर करने का तरीका अलग-अलग होता है। बैक्टीरिया वायरस खत्म हो रहे हैं या नहीं, पीएचपीए सही है कि नहीं। सारे मिनरल कंट्रोल रेंज में रहना चाहिए। नहीं तो कैल्शियम की कमी, हड्डियां कमजोर हो जाना, डायरिया, दस्त, उल्टी, वायरल डिजीज, बैक्टीरिया जनित बीमारियों की संभावना रहती है।

डॉ. कैलाश राहड़, सीनियर फिजिशियन, बीडीके अस्पताल झुंझुनूं