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गांव हो तो ऐसा: गरीब पिता की मौत के बाद 2 बेटियों की शादी पर आया संकट, ग्रुप बनाकर कुछ ही घंटों में लगा दिया रुपयों का ढेर

करंट से युवक की मौत के बाद विद्युत निगम की तरफ से हालांकि परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला लेकिन मृतक की दो बेटियों की शादी में कन्यादान के लिए गांव के युवा आगे आए हैं।
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झुंझुनू

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Santosh Trivedi

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Updated: 15 Mar 2023, 1:48 PM IST

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शादी से दो दिन पहले अपने घर पर अपनी बेटियों के साथ बैठी राजबाला

संजय रेपस्वाल

गुढ़ागौड़जी. करंट से युवक की मौत के बाद विद्युत निगम की तरफ से हालांकि परिवार को कोई मुआवजा नहीं मिला लेकिन मृतक की दो बेटियों की शादी में कन्यादान के लिए गांव के युवा आगे आए हैं। उन्होंने एक ग्रुप बना कर 50 हजार रुपए से ज्यादा की राशि कन्यादान के लिए जुटा ली है। दरअसल गुढ़ाबावनी का सुरेंद्र योगी गांव में छोटा मोटा काम कर अपने घर को चलाता था। एक साल पहले किसी के खेत में लावणी का काम करते समय करंट लगने से उसकी मौत हो गई। सुरेंद्र के पिता फूलनाथ की आठ साल पहले और भाई शीशराम की 20 साल पहले मौत हो चुकी। ऐसे में घर की पूरी जिम्मेदारी सुरेंद्र की पत्नी राजबाला पर आ गईं। राजबाला के एक बूढ़ी सास, एक बेटा और दो बेटियां हैं। घर चलाने के लिए बेटे विकास ने नरेगा में मजदूरी शुरू की।

कई चक्कर काटे:
विकास ने बताया की पिता की मौत के बाद बिजली निगम के अधिकारियों ने आश्वासन दिया था कि उन्हें क्लेम राशि दी जाएगी। लेकिन 12 महीने बाद भी वह बिजली निगम के चक्कर लगा रहा है।

गांव की युवा टीम मदद के लिए आगे आई:
राजबाला की चिंता को देखते हुए गांव के युवाओं टीम मदद के लिए आगे आई है। टीम में शामिल संदीप सिंह शेखावत ने बताया कि उन्होंने सोशल मीडिया पर अपील कर लोगों से मदद मांगी। अब तक करीब 50 हजार रुपए से ज्यादा की सहायता राशि कन्यादान के लिए आ चुकी है। उनका प्रयास जारी है।

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एक रोज बाद है दो बेटियों की शादी:
राजबाला ने बताया कि उसकी दोनों बेटियों की शादी एक दिन बाद है। लेकिन आर्थिक स्थिति ठीक नहीं होने के कारण वह चिंतित है। उसने बताया कि उनके पास कोई जमीन नहीं है। वह जोहड़ की जमीन में रहते हैं। यहां से उन्हें कभी भी बेघर किया जा सकता है।

इनका कहना है:
ऐसे मामलों की जांच बिजली निगम की कमेटी बनाकर की जाती है। इस मामले की जांच दो बार हो चुकी है। जांच में इन्हें डिफाल्टर माना गया है।
उम्मेद सिंह शेखावत, सहायक अभियंता, विद्युत निगम, गुढ़ागौड़जी