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जोधपुर में स्वाइन फ्लू बरपा रहा कहर, आज फिर महिला ने गंवाई जान, रहें सावधान

जोधपुर में स्वाइन फ्लू से मरने वाले रोगियों की संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है।

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जोधपुर . शहर में स्वाइन फ्लू अपना कहर जम कर बरपा रहा है। यहां आज एक और महिला की जान स्वाइन फ्लू लील गया। जानकारी के अनुसार चौहाबो रेवासी 40 वर्षीय एक महिला की पहले रिपोर्ट पॉजीटिव आई थी। लेकिन बाद में निगेटिव आ गई थी। हालांकि नियमानुसार ऐसी महिला की मौत का कारण स्वाइन फ्लू नहीं माना जाता है।

स्वाइन फ्लू से दो और मौत, एक की रिपोर्ट से पहले मौत

जोधपुर में स्वाइन फ्लू से मरने वाले रोगियों की संख्या में दिनोंदिन इजाफा हो रहा है। नए साल की शुरुआत के पहले दिन सोमवार बीती रात एक 55 वर्षीय धनकारीकला गांव जोधपुर निवासी महिला की मौत हो गईं। इसके बाद दूसरे दिन मंगलवार को एक और पाली निवासी 55 वर्षीय महिला की मौत हो गई। इस महिला की रिपोर्ट आने से पहले मौत हो गई। जोधपुर में इस सीजन में स्वाइन फ्लू से 30 लोगों की मौत हो गई। वहीं इस दिन एक जैसलमेर निवासी 25 वर्षीय महिला स्वाइन फ्लू पॉजीटिव पाई गई।

बीते साल २८ जिंदगियां लील गया स्वाइन फ्लू

जोधपुर संभाग में एच-१ एन-१ वायरस कहर बनकर कई परिवारों पर टूटा है। बीते साल २०१७ में स्वाइन फ्लू से मरने वाले रोगियों की संख्या २८ रही, जिसमें से अकेले जोधपुर जिले से मरने वाले स्वाइन फ्लू के १२ रोगी थे, शेष १६ स्वाइन फ्लू रोगी संभाग के बाड़मेर, जालोर, जैसलमेर व पाली जिले से थे। वर्ष २०१६ में स्वाइन फ्लू से महज १ रोगी की मौत हुई थी। इस साल ४४ रोगी पॉजिटिव आए थे। दूसरी साल २०१७ में कुल ९३० सैंपल स्वाइन फ्लू के लगे, जिसमें १५३ मरीज पॉजिटिव मिले थे। जबकि साल २०१५ में २५४, २०१३ में २१४, २०१२ में १७७ और २००९ में सबसे अधिक ६८४ स्वाइन फ्लू रोगी पॉजिटिव मिले थे। हालांकि इस बार चिकित्सकों के अनुसार स्वाइन फ्लू का बदला हुआ स्ट्रेन है, जिस कारण से रोगियों की संख्या में भी इजाफा हो सकता है।

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गत ९ वर्ष में स्वाइन फ्लू से मौत के आंकड़े

साल - मृतक


२००९ - ८०
२०१० - ७
२०११ - ६
२०१२ - २३
२०१३ - ४८
२०१४ - २
२०१५ - ३०
२०१६ - १
२०१७ - २८

बढ़ सकते हैं मरीज

स्वाइन फ्लू के मरीज नए साल में और बढ़ सकते हैं, क्योंकि सर्दी का मौसम अभी चालू हुआ है। लक्षण दिखते ही तुरंत रोगियों को चिकित्सक से संपर्क साध लेना चाहिए। रोगी की स्थिति बिगडऩे के आसार की बड़ी वजह इलाज में लेटलतीफी होती है। मिशीगन स्ट्रेन में बड़ी बात यह है कि इसमें ट्रीटमेंट लागू हो रहा है, जो सुखद बात है।


- डॉ. नवीन किशोरिया, आचार्य, मेडिसिन विभाग, डॉ. एसएन मेडिकल कॉलेज