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जोधपुर में भूकंप की यह रही बड़ी वजह, भू-गर्भ की ऊर्जा निकलने का बढ़ा खतरा

इंडियन प्लेट के चाइना प्लेट से टकराने का कारण अब थार से बढ़ेगा ऊर्जा का उत्सर्जन  
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जोधपुर

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Gajendra Singh Dahiya

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Updated: 20 Nov 2017, 1:08 PM IST

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जोधपुर . जमीन के नीचे इंडियन प्लेट पर खाटू से सिरोही तक का लिनियामेंट एक्टिव हो गया है यानि यहां की जमीन कमजोर होने से भू-गर्भ की ऊर्जा निकलने का खतरा बढ़ गया है। इसके चलते मारवाड़ और मेवाड़ को अलग करने वाले इलाकों में भूकम्प की आशंका बढ़ती जा रही है। विशेषकर पाली जिले में, जहां रह-रहकर कई बार हल्के भूकम्प आते रहते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि जोधपुर में शनिवार को आया भूकम्प भी इसी लिनियामेंट के समानांतर था। एेसे में अब अरावली क्रेटोन का अध्ययन अनिवार्य हो गया है।

पूरा विश्व भूगर्भ के नीचे कई प्लेटों के ऊपर तैर रहा है। भारत इंडियन प्लेट पर टिका हुआ है। भारत के अलावा श्रीलंका, अफगानिस्तान, नेपाल, बर्मा और फिलिपींस इण्डियन प्लेट पर टिके हुए हैं। इस प्लेट के किनारों पर नेपाल व अफगानिस्तान जैसे देश हैं, इसलिए ये दोनों भूकम्प के लिहाज से सर्वाधिक खतरे वाले जोन पांच में आते हैं। इण्डियन प्लेट के पीछे का हिस्सा शील्ड के रूप में है, जहां राजस्थान, गुजरात और महाराष्ट्र का पश्चिमी हिस्सा आता है। भुज में इंडियन प्लेट कटी हुई है जो सम धोरों तक फैली हुई है। इंडियन प्लेट, चाइना प्लेट से लगातार टकरा रही है। चाइना प्लेट मजबूत है जिसकी वजह से इंडियन प्लेट के टकराने पर इसके कमजोर हिस्सों से ऊर्जा निकलती है। इंडियन प्लेट पर कई लिनियामेंट हैं, जिसमें खाटू से सिरोही तक लिनियामेंट महत्वपूर्ण है। इंडियन प्लेट जैसे ही चाइना प्लेट से टकराती है, सबसे कमजोर लिनियामेंट से सिसमिक तरंगों के माध्यम से ऊर्जा बाहर निकल आती है।

कमजोर हो गई अरावली की परिधि


खाटू-सिरोही लिनियामेंट अरावली की परिधि के पास स्थित है। अरावली विश्व की सबसे प्राचीन पर्वत शृंखलाओं यानी गोंडवाना लैण्ड का हिस्सा है। अरावली की परिधि कमजोर होने से उसके किनारे बसे भू-स्थलों पर धरती डोलने का खतरा कुछ बढ़ जाता है।

अब अध्ययन जरूरी हो गया


राजस्थान के नीचे टेक्नोनिक प्रक्रिया में बदलाव हो रहा है। एेसे में अब यहां की प्लेट, लिनियामेंट और चट्टानों का अध्ययन अनिवार्य हो गया है, ताकि बदलते समय के साथ भूकम्प जोन का पुनर्निधारण किया जा सके। खाटू से लेकर सिरोही तक के लिनियामेंट की वजह से जोधपुर, पाली और आस-पास के इलाकों में भूकम्प आ सकते हैं।

प्रो. एससी माथुर, भू-विज्ञान विभाग, जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय, जोधपुर