
जोधपुर के जयनारायण व्यास विश्वविद्यालय में मनोविज्ञान की प्रयोगशाला को खाली कराकर वहां छात्रसंघ कार्यालय बना दिया गया है। इस प्रयोगशाला के उपकरण भी नदारद हैं। स्नातक की शिक्षा ग्रहण कर रहे छात्रों को उनके शिक्षण में यह प्रयोगशाला नसीब नहीं होगी। मनोविज्ञान के छात्रों से तिरस्कृत करने वाला व्यवहार तो उनके मन का विज्ञान बिगाड़ डालेगा। विश्वविद्यालय में पत्रकारिता का पाठ्यक्रम दो साल पहले शुरू किया गया, लेकिन इस विभाग में एक भी शिक्षक नहीं हैं। पत्रकारिता पढ़ने वाले छात्रों को हिंदी विभाग के शिक्षक पत्रकारिता के सिद्धांत समझा रहे हैं। वे ही उन्हें खबरों को लिखने और खबरों के इतर झांकने की तकनीकें बता रहे हैं। मारवाड़ के इस सबसे बड़े उच्च शिक्षण संस्थान में कमाल का काम हो रहा है। कभी-कभी लगता है कि यह छात्रों के भविष्य को बनाने वाला कम और खिलवाड़ करने वाला संस्थान अधिक बनकर रह गया है। विचारणीय बात यह भी है कि क्या जोधपुर के लोग कभी सवाल पूछेंगे कि विश्वविद्यालय में जब हमारे बच्चों को पढ़ाने वाले ही नहीं थे तो वे क्या और किससे पढ़ कर शिक्षित हुए? बिना किसी शिक्षक और बिना प्रयोगशाला के पढ़कर डिग्री लेकर आने वाले यही छात्र आगे चलकर शिक्षक बनेंगे और दूसरी पीढ़ी को क्या पढ़ाएंगे? यह एेसे हालात देखकर समझा जा सकता है। विश्वविद्यालय में ४५ विभाग हैं, जिनमें जिसमें १२५ पाठ्यक्रमों की पढ़ाई कराई जाती है। इस संस्थान में ६४८ शिक्षकों के पद हैं, जिनमें से आधे करीब ३०२ पद खाली हैं। दो सौ शिक्षक गेस्ट फैकल्टी के तहत काम कर रहे हैं और वे बरसों से परमानेंट होने का 'परमानेंटÓ सपना देख रहे हैं। बिना शिक्षकों के ही विभाग चल रहे हैं। क्या पढ़ाया जा रहा है। इससे किसी को कोई मतलब नहीं है। ना ही शिक्षकों को ना शहर के जनप्रतिनिधियों को और ना ही छात्रों को।
हालात ये हैं कि विश्वविद्यालय शिक्षा का कम और भ्रष्टाचार का अधिक बड़ा केन्द्र बन गया है। वर्ष २०१२-१३ में यहां १५४ शिक्षकों की भर्ती की गई। कालांतर में वही भर्ती घोटाले के रूप में सामने आई। भ्रष्टाचार निरोधक ब्यूरो इसकी जांच कर रहा है। अब तक ३४ फर्जी तरीके से भर्ती शिक्षक बर्खास्त किए जा चुके हैं। इनके खिलाफ अदालत में चालान पेश हो चुके हैं। बाकियों के मामले की भी जांच चल रही है। अब भी दो भर्ती चल रही है और दोनों ही विवादों में फंसी हुई हैं। विश्वविद्यालय की ऐसी हालत होने के बाद भी सभी चुप हैं। सरकार को भी कोई लेना देना नहीं है। क्या यही उच्च शिक्षा संस्थान हमारी पीढ़ी को गढ़ रहे हैं। यह ऐसा एक मामला है, जिसमें छात्रों को पेड़ के नीचे बैठना पड़ा हो, लेकिन हालात अच्छे नहीं हैं। इन्हें सुधारना होगा। हम देश-दुनिया के विश्वविद्यालयों की सूची में कहीं नहीं हैं। आखिर क्यों...? इसके लिए कौन जिम्मेदार हैं...? शायद वही, जिन पर इस पीढ़ी को शिक्षित करने की जिम्मेदारी है और सरकार। समय है कि अब भी हालात बदले जाएं। सरकार गड़बड़ी करने के दोषियों के खिलाफ कार्रवाई कर माहौल सुधारे और विश्वविद्यालय की साख को बचाए।
पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करते बच्चों के नजारे गांव-ढाणियों के सरकारी स्कूलों में तो देखे होंगे, लेकिन शिक्षा के सर्वोच्च संस्थान में एेसा नजारा हो तो क्या कहिएगा। जी हां, प्रदेश के बड़े शिक्षा संस्थानों में शुमार जयनारायण विश्वविद्यालय में प्रोफेसर पेड़ की छांव में बीए मनोविज्ञान के छात्रों को पढ़ाते हैं। प्रदेश के दूसरे बड़े शहर के इस विश्वविद्यालय में ये हाल खुद विवि प्रशासन की अनदेखी का नतीजा है। इतना ही नहीं, अति तो तब हो गई, जब छात्रों ने इन हालात का विरोध। इस विवि प्रशासन ने छात्रों के विरोध के बाद निकट ही बने गैराज में कक्षा संचालित करने के निर्देश दे डाले।दरअसल, विश्वविद्यालय के पुराना परिसर में स्थित सायंकालीन अध्ययन संस्थान में संचालित मनोविज्ञान विभाग की प्रयोगशाला विवि प्रशासन ने छात्रसंघ कार्यालय के लिए आवंटित कर दी है। विवि प्रशासन के दबाव में विभागाध्यक्ष प्रो. एलएन बुनकर ने प्रयोगशाला की चाबी अधिकारियों को सौंप दी। अब बीए मनोविज्ञान के छात्रों के लिए पेड़ के नीचे बैठकर पढ़ाई करने के अलावा कोई चारा नहीं बचा। विवि का मनोविज्ञान विभाग नया परिसर में है, जहां स्नातकोत्तर कक्षाएं चलती हैं। स्नातक स्तर पर मनोविज्ञान विषय लेने वाले छात्रों के लिए कक्षा पुराना परिसर स्थित सायंकालीन अध्ययन संस्थान में लगती है। वहां स्नातक के छात्रों के लिए मनोविज्ञान प्रयोगशाला बनी हुई है। इसी सप्ताह विवि के कुलपति प्रो. आरपी सिंह ने प्रयोगशाला छात्रसंघ कार्यालय के लिए आवंटित कर दी। विवि कर्मचारियों ने वहां ताला लगा दिया। उसके बाद पिछले दिन अर्पिता कक्कड़ सहित अन्य शिक्षक बीए प्रथम वर्ष की कक्षा पेड़ के नीचे लगा रहे हैं। छात्र वहां पढ़ाई कर रहे हैं, लेकिन प्रायोगिक कार्य बंद है।
प्रयोगशाला उपकरण व फर्नीचर गायब
मनोविज्ञान प्रयोगशाला से उपकरण और सामान गायब है। यहां तक कि ५० कुर्सियां और टेबले भी गायब कर दी गई हैं। सूत्रों के मुताबिक प्रयोगशाला का अधिकांश सामान केएन कॉलेज के पास संचालित विवि के ही टेप्से एण्ड हेप्सन में शिफ्ट कर दिया गया है, लेकिन लिखित सूचना नहीं है।
अब गैराज आवंटित
विवि प्रशासन ने दो-तीन दिन से छात्रों के बढऩे दबाव के बाद बीए मनोविज्ञान विभाग के लिए परिसर में ही गैराज को कक्षा के रूप में काम लेने के निर्देश दिए हैं। साथ ही पुरानी प्रयोगशाला के एक कमरे को सुबह ८ से दोपहर २ बजे तक काम में लेने की छूट दी है। फिलहाल कक्षा पेड़ के नीचे लग रही है।
झूठ बोलकर प्रयोगशाला छीन ली
विवि प्रशासन ने यह कहकर प्रयोगशाला को छात्रसंघ को आवंटित कर दिया कि यहां कक्षा नहीं लगती है। विविकर्मियों ने कुलपति के आदेश का हवाला देकर चाबी ले ली। प्रो. एलएन बुनकर, एचओडी, मनोविज्ञान विभाग, जेएनवीय
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Published on:
14 Oct 2017, 3:18 PM IST
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