नियमों से परे जाकर स्वीकृत हुआ था ले आउट प्लान
पाल गांव के खसरा संख्या 375 का एक ले-आउट प्लान नियमों से परे जाकर स्वीकृत हुआ था। माथुर, रल्हन व गिरी ने इस प्लान को जारी किया था। जांच के बाद एसीबी ने तीनों के खिलाफ अभियोजन स्वीकृति मांगी, लेकिन माथुर की अभियोजन स्वीकृति नगरीय विकास विभाग ने यह कहते हुए निरस्त कर दी कि 'अभियोजन स्वीकृति जारी करने के संबंध में मुख्य नगर नियोजक की जांच रिपोर्ट पर सक्षम स्तर पर हुए निर्णय के अनुसार प्रकरण में किसी प्रकार की कार्रवाई अपेक्षित नहीं है।' जबकि एसीबी के पत्र में स्पष्ट रूप से बता दिया गया था कि अभियोजन स्वीकृति पर विचार करते समय सक्षम अधिकारी की ओर से ही आरोपित लोक सेवक की सुनवाई का मौका देना, उससे अभ्यावेदन प्राप्त करना एवं उस पर विचार करना या किसी प्रकार की समानांतर जांच करना विधिक प्रावधानों के अनुरूप नहीं है।