तीन साल पहले मो. फारूक का एक्सीडेंट हो गया था। उसके बाद से वे चल नहीं पा रहे, लेकिन लोकतंत्र के उत्सव में भागीदारी निभाना नहीं भूले। नैनीजी का मंदिर में जब व्हील चेयर पर मतदान के लिए पहुंचे तो रैम्प नहीं था। परिवार के लोग उनको व्हील चेयर के साथ उठाकर ले गए और मतदान करवाया। फारूक जैसे लाग ही लोकतंत्र के इस महापर्व को जीवंत रखे हुए है। सरदारपुरा विधानसभा सीट पर जब लाइव रिपोर्ट करने पत्रिका टीम पहुंची तो शुरुआत की कुछ ऐसी हुई।