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मूंगफली की रिकॉर्ड बुवाई के बाद बम्पर उत्पादन, मंदी के दौर से उबरने में होगी सहायक

गिरते भावों से किसानों के चेहरे पर चिंता की लकीरें  
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जोधपुर

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Amit Dave

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Updated: 27 Sep 2017, 4:02 PM IST

farming in jodhpur

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जोधपुर .

जिले में किसानों को मूंगफली की फ सल रास आ रही है। गत वर्ष की भांति इस वर्ष भी सिंचित क्षेत्र में किसानों ने मूंगफ ली की बुवाई सरकार के तय लक्ष्य से अधिक व गत वर्षों की अपेक्षा रिकॉर्ड बुवाई की। कुछ स्थानों पर गोजा लट व जड़ गलन के मूंगफ ली फ सल खराबे के अपवाद को छोड़ शेष पूरे क्षेत्र में सामान्य बरसात होने से बम्पर उत्पादन होने का अनुमान है। अन्नदाता के रूप में किसानों की खरीफ सीजन की मेहनत रंग ला रही है। मूंगफ ली के अच्छे उत्पादन से प्रदेश की तिलहन में आत्मनिर्भर होने की भी उम्मीदें जगाई हैं। त्योहार से पूर्व फ सल के अच्छे उत्पादन के अनुमान बाजार को मंदी के दौर से बाहर निकालने में सहायक होगा।

इसलिए बढ़ रही चिंता

भावों को लेकर किसान चिंतित हैं। किसानों के अनुसार, अगर उनको उनकी उपज के सही भाव मिल जाए तो उनके लिए मूंगफली फायदे का सौदा साबित होगी। गत वर्ष मूंगफ ली में किसानों को 6700 की प्रति क्विंटल लागत के आधार पर 600 करोड़ से अधिक का आर्थिक नुकसान केवल मूंगफ ली की फ सल पर उठाना पड़ा था। इस बार भी सरकार मूंगफ ली खरीद नहीं करती है, तो जोधपुर के किसानों को 900 करोड़ से अधिक का नुकसान मूंगफ ली की फ सल में उठाना पड़ेगा। मूंगफली की फसल तैयार होकर करीब १५-२० दिन बाद बाजार में आने को तैयार है।

प्रमुख किस्में


जिले के मूंगफली बुवाई क्षेत्र के अधिकांश हिस्से में मुख्यत तीन प्रकार की क्वालिटी वाली अलग-अलग किस्मों की बुवाई होती है। इनमें जी-२० व जी-१० किस्म बोई जाती है। कुछ क्षेत्रों में बड़े दाने वाला एम-१३ भी बोया जाता है।

समर्थन मूल्य से ज्यादा लागत

किसान को मूंगफली की फसल में तवी, कल्टी, पाटा, देशी खाद, रासायनिक खाद, डीएपी स्प्रे, निराई, सिंचाई, मजदूरी, उखड़ाई, थ्रेसिंग, पैकिंग, ट्रांसपोर्ट, रखवाली, जमीन, ट्यूबवेल किराया, प्रीमियम (बीमा) सहित जंगली जानवरों से नुकसान आदि पर एक बीघा में करीब २०१३३ रुपए लागत आती है, जिसमें ३ क्विंटल उपज होती है। इस प्रकार प्रति क्विंटल लागत ६७११ रुपए आती है, जो समर्थन मूल्य ४२०० रुपए से काफी कम है।

लागत आधारित मूल्य ही एकमात्र उपाय

मूंगफ ली की उत्पादन लागत 6700 रुपए प्रति क्विंटल से अधिक आती है। सरकार ने 4450 रुपए समर्थन मूल्य तय कर रखा है। उस पर भी खरीद के लिए सरकार पसोपेश में है। किसानों को अच्छा उत्पादन होने पर भी 3700 रुपए प्रति क्विंटल मूंगफ ली बेचकर नुकसान उठाना पड़ेगा। इससे निश्चित है कि उत्पादन बढ़ाना या प्रति हैक्टेयर यील्ड बढऩे से किसानों का आर्थिक उत्थान संभव नही है। इसके लिए किसानों को लागत आधारित लाभकारी मूल्य देना ही एक मात्र उपाय है।


तुलछाराम सिंवर, प्रांत जैविक प्रमुख, भारतीय किसान संघ, जोधपुर