
आधा जोधपुर शहर पानी पर तैर रहा, शहर की बिल्डिंग पर मंडरा रहा खतरा
जोधपुर . शहर में सरदारपुरा बी रोड पर तीन मंजिला इमारत ढहने वाले हादसे ने निगम और भूजल विभाग की पोल खोल कर रख दी है। एक तरफ जहां आधे से ज्यादा शहर में भूजल स्तर बढा हुआ है, वहीं निगम और भूजल विभाग बेसमेंट (अंडरग्राउंड) निर्माण की धड़ल्ले से अनुमति दे रहा है। भूगर्भ वैज्ञानिकों के अनुसार बेसमेंट निर्माण के लिए जोधपुर की भौगोलिक स्थिति बिल्कुल अनुकूल नहीं है। अधिकांश स्थल पर रायोलाइट रॉक है तो वहीं अधिकांश स्थल रेतीला है जहां भूजल स्तर बढ़ा हुआ है। ऐसे में निर्माण संभव नहीं है। जहां रेतीला क्षेत्र है वहां बेसमेंट की खुदाई तो आसान है लेकिन वह सबसे ज्यादा खतरनाक है। रेत पर दीवार मजबूत नहीं होती ऐसे में यहां स्ट्रक्चर कभी भी घिर सकता हैं। सरदारपुरा क्षेत्र भी रेतीले क्षेत्र में आता है, ऐसे में यहां बेसमेंट का निर्माण सुरक्षित नहीं है। साथ ही भूजल स्तर भी यहां ज्यादा रहता है। पावटा सी रोड़, बीजेएस,महामंदिर, घंटाघर के आस-पास का क्षेत्र, त्रिपोलिया, भीतरी शहर, रातानाड़ा व सरदारपुरा का क्षेत्र बेसमेंट के लिए ठीक नहीं है। इसके बावजूद कोई भी नागरिक निगम से शहर के किसी भी हिस्से में बेसमेंट निर्माण के लिए अनुमति ले सकता है।
यहां नहीं हो सकती खुदाई
शहर में अधिकांश हिस्सा पहाड़ी है। प्रताप नगर, मसुरिया, किले की पहाडिय़ां, चांद पोल के आसपास के क्षेत्र में रायोलाइट रॉक है। यह रॉक इतनी सख्त होती है कि इसमें खुदाई संभव नहीं।
अनुमति की प्रक्रिया पर ही सवाल
निगम वर्तमान में जीडब्ल्यूडी की एनओसी से बेसमेंट बनाने की अनुमति दे रहा है, जो गलत है। भौगोलिक स्थिति के साथ ही बेसमेंट निर्माण के समय तकनीकका जायजा लेना भी जरूरी है। कंकरीट व स्टील के बेस से ही भवन व बेसमेंट मजबूत रह सकता है।
भूखंड मालिक को नोटिस दिया है। सभी विधानसभा क्षेत्र में अवैध निर्माण की जानकारी लाने के निर्देश जारी किए हैं। साथ ही जारी निर्माण में सुरक्षा के साधन अपनाए गए हैं या नहीं, इसकी भी जांच के निर्देश दिए हैं।
-घनश्याम ओझा, महापौर
जोधपुर में बेसमेंट निर्माण के लिए परिस्थितियां अनुकूल नहीं है। यहां रायोलाइट रेतीला क्षेत्र है, अंडरग्राउंड वाटर लेवल भी ज्यादा है। निगम परमिशन देते समय महज वाटर लेवल देख रहा है। इसके साथ रॉक भी देखें। साथ ही इंजीनियरिंग स्ट्रक्चर भी देखें। क्योंकि केवल इंजीनियरिंग स्ट्रक्चर से ही भवन मजबूत बन सकता है।
- प्रो.केएल श्रीवास्तव, प्रोफेसर, भूगर्भ विज्ञान, जेएनवीयू
शहर में धड़ल्ले से अवैध निर्माण हो रहे हैं। सीज भवन कुछ दिनों बाद खोल भी दिए जाते हैं। भवन निर्माण के उचित मापदंड भी नहीं अपनाए जा रहे हैं। फिर भी कोई कार्रवाई नहीं हो रही है। मंगलवार को हादसे में हुए नुकसान के लिए भी पीडि़त को मुआवजा मिलना चाहिए।
-राजेन्द्र सोलंकी, नेता प्रतिपक्ष
Published on:
24 May 2018 05:27 pm
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.
