3 सितंबर 2015 को करीब बारह बजे जब आनंदपाल को पेशी पर नागौर ले जाया जा रहा था इस दौरान वह अपने साथियों के साथ फरार हो गया था। जिसके बाद पुलिस मुख्यालय तक में खलबली मच गई। अजमेर रेंज आईजी मालिनी अग्रवाल समेत रेंज के तमाम अफसर उसकी तलाश में जुटे, लेकिन बात नहीं बनी। जांच और तलाश का दायरा बढ़ते-बढ़ते इतना बढ़ गया कि एसओजी, एटीएस, ईआरटी, क्यूआरटी समेत सात पुलिस टीमों का गठन किया गया। इन टीमों में प्रदेश भर के काबिल बारह आईपीएस, बीस आरपीएस और कई इंस्पेटर लगाए गए। पूरी टीम में 150 पुलिसकर्मी शामिल किए गए। उसके बाद आनंदपाल की तलाश का काम जो शुरू हुआ वो उसके एनकाउंटर पर जाकर खत्म हुआ। केस से जुड़े पुलिस अफसरों और कर्मियों ने 22 महीने में हरियाणा, उत्तर प्रदेश, दिल्ली और पंजाब तक की कई बार यात्रा कर ली है।