याचिकाकर्ताओं की ओर से अधिवक्ता हेमंत नाहटा, हनुमान खोखर व संजय विश्नोई ने कहा कि अंबर बी कार का नाम अभियोजन पक्ष की ओर से पेश की गई मूल सूची में नहीं था। अभियोजन पक्ष मामले को लंबित करने के उद्देश्य से नए नए गवाहों के नाम शामिल कर रहा है, जिससे सुनवाई में देरी हो रही है। इस पर अभियोजन पक्ष की ओर से सीबीआई के विशिष्ट लोक अभियोजक पन्नेसिंह रातडी ने कहा कि जलोडा में मिली भंवरी की हड्डियों के डीएनए परीक्षण के लिए एफबीआई अमरीका भेजा गया था, जो कि चार्जशीट पेश करने के बाद प्राप्त हुई। चंूकि विधि अनुसार परीक्षण रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी को कोर्ट में उपस्थित होकर गवाही देना आवश्यक होता है और यह रिपोर्ट इस मामले के निर्णय के लिए अहम सबूत हैं। इसलिए गवाहों की मूल सूची के बाद उसकी गवाही के लिए सीआरपीसी की धारा 311 के तहत आवेदन पेश किया गया। जिसे निचली अदालत ने भी स्वीकृत किया। उन्होंने कहा कि सीबीआई की ओर से पेश गवाहों की मूल सूची में से करीब एक सौ गवाहों के नाम वापस ले लिए गए हैं। इसलिए सीबीआई पर मामला लंबित करने का दोष नहीं लगाया जा सकता।