चूंकि विधि अनुसार परीक्षण रिपोर्ट पर हस्ताक्षर करने वाले अधिकारी को कोर्ट में उपस्थित हो कर गवाही देना आवश्यक होता है, और यह रिपोर्ट इस मामले के निर्णय के लिए अहम सबूत है। इस लिए गवाहों की मूल सूचि के बाद उसकी गवाही के लिए सीआरपीसी की धारा 311 के तहत आवेदन पेश किया गया। जिसे निचली अदालत ने भी स्वीकृत किया। उन्होंने कहा कि सीबीआई की ओर से पेश गवाहों की मूल सूचि में से करीब एक सौ गवाहों के नाम वापिस ले लिए गए है, इस लिए सीबीआई पर मामला लंबित करने का दोष नहीं लगाया जा सकता। भंवरी देवी अपहरण व हत्या केस में आरोपियों की ओर से सीआरपीसी धारा 482 के तहत दायर विविध अपराधिक याचिका खारिज कर दी गई।