
पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक फोटो IANS
Subrat Pathak SP PDA Statement: समाजवादी पार्टी के पीडीए (पिछड़ा-दलित-अल्पसंख्यक) नैरेटिव पर पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने आरोप लगाया कि सपा टिकट बंटवारे में परिवार और अमीरों को प्राथमिकता देती है। वहीं, सपा ने पीडीए प्रहरी अभियान के जरिए वोटर लिस्ट सुधारने की मुहिम तेज कर दी है और युवाओं के मुद्दे पर भाजपा पर निशाना साधा है।
कन्नौज में पूर्व भाजपा सांसद सुब्रत पाठक ने कहा कि समाजवादी पार्टी का पीडीए नैरेटिव बार-बार बेनकाब हो चुका है। चुनावों के दौरान साफ हो गया कि पीडीए का मतलब ‘परिवार डेवलपमेंट अथॉरिटी’ है। पार्टी राजनीतिक परिवारों और अमीर लोगों को प्राथमिकता देती है। तो इस व्यवस्था में मुस्लिम, दलित और अन्य पिछड़े समुदाय कहां हैं? जब टिकट सिर्फ कुछ लोगों, परिवार के सदस्यों और अमीर परिवारों में बांटे जाते हैं, तो ये समुदाय पार्टी का समर्थन क्यों करेंगे? पाठक के इस बयान को सपा की सामाजिक इंजीनियरिंग पर सवाल के रूप में देखा जा रहा है।
लखनऊ में समाजवादी पार्टी ने ‘पीडीए प्रहरी’ अभियान बूथ स्तर पर शुरू किया है। अभियान के तहत कथित तौर पर वोटर लिस्ट से हटाए गए नामों को वापस शामिल कराने की कोशिश की जा रही है। एसएसआर (स्पेशल समरी रिवीजन) प्रक्रिया के जरिए फर्जी वोटरों को रोकने के कदम उठाए जा रहे हैं। पीडीए प्रहरी सदस्य बीएलओ से वोटर लिस्ट लेकर नामों का सत्यापन कर रहे हैं और नाम कटने के कारणों की जानकारी जुटा रहे हैं। सपा प्रवक्ता दीपक रंजन श्रीवास्तव कार्यकर्ताओं के साथ अभियान का नेतृत्व कर रहे हैं।
सपा विधायक रविदास मेहरोत्रा ने कहा कि भारत में युवा विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं और जेन-जेड सड़कों पर उतर रहा है। भाजपा सरकार दमन, उत्पीड़न और अन्याय के जरिए उनकी आवाज दबाने की कोशिश कर रही है। जैसे नेपाल में जेन-जेड ने आंदोलन किया, वैसे ही भारत में युवाओं का आक्रोश उससे भी ज्यादा है। ये बयानबाजी 2027 के विधानसभा चुनाव से पहले दोनों दलों के बीच नैरेटिव की जंग का हिस्सा बन गई है। सपा पीडीए को मजबूत करने पर जोर दे रही है, जबकि भाजपा इसे परिवारवाद बताकर हमलावर है।
Updated on:
17 Oct 2026 09:57 pm
Published on:
17 Oct 2026 09:57 pm
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