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अमित शाह के अदृश्य लड़ाके सरपट दौड़े, अखिलेश का खजांची और राहुल का गब्बर पिछड़ा

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान अतिम शाह के इन रणकुंबरों ने विरोधियों के छुड़ाए पसीने...
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कानपुर

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Nitin Srivastva

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Updated: 2 Jan 2018, 9:32 AM IST

BJP IT cell strategy for UP election kanpur hindi news

अमित शाह के अदृश्य लड़ाके सरपट दौड़े, अखिलेश का खजांची और राहुल का गब्बर पिछड़ा

कानपुर. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर 2016 को नोटंबदी का ऐलान कर लोगों को बैंकों की लाइन में लगा दिया, जो राजनीतिक दलों के लिए एक चुनावी मुद्दा बन गया। नोटबंदी के दौरान कानपुर में एक महिला ने बैंक के बाहर बच्चे को जन्म दिया, जो पूरे साल चर्चा में रहा। गांव वालों ने बच्चे का नाम खजांची रखा तो पूर्व सीएम अखिलेश यादव ने विधानसभा के चुनाव में इस मुद्दे को खूब उछाला, लेकिन अमित शाह के अदृश्य लड़ाकों के चलते यह जुमला टिक नहीं पाया। गुजरात चुनाव में राहुल गाधी जीएसटी को लेकर जनता के बीच गए और इसे नया नाम गब्बर सिंह टैक्स दिया। लेकिन सोशल मीडिया को हथियार बनाकर अदृश्य युवा रणनीतिकारों ने भाजपा को यहां भी फतह दिलवा दी। कानपुर-बुंदेलखंड के मीडिया प्रभारी मोहित पांडेय कहते हैं कि यह टीम अंसल भवन में 24 घंटे काम करती है और यूपी के चुनावों में बेहतर रणनीति के साथ काम कर कमल खिलावाया।

52 सीटों का दिया गया था लक्ष्य

यूपी विधानसभा चुनाव से पहले राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने कानपुर के रूमा में बूथ प्रमख सम्मेलन बुलाया था। यहां पर 52 विधानसभा क्षेत्रों के 18 हजार बूथ अध्यक्ष पहुंचे। जहां पर उन्हें आईटी सेल में काम करने वाले लड़ाकों से इनका परिचय कराया गया। इन लड़ाकों ने बूथ पर मौजूद प्रमुख के साथ बात कर जमीनी इनपुट लेते रहे और आगे की रणनीति पर काम का आदेश देते रहे। जिसका परिणाम रहा कि पार्टी ने 52 में से 47 सीटों पर जीत हासिल की। वहीं निकाय में भी इन्हीं के बल पर भाजपा ने चुनावी दंगल फतह किया। विपक्षी दलों को मात देने के लिए उन्होंने एक से बढ़कर एक बिसात भी बिछाई। सिकंदरा उपचुनाव की बाजी चाहे जिस राजनीतिक पार्टी के हाथ लगे, सोशल मीडिया के माध्यम से सर्वाधिक चालें तो भाजपा ने ही चली हैं। परदे के पीछे की असली भूमिका उन अदृश्य लड़ाकों की आइटी टीम की मानी जा सकती है जो कानपुर में बैठकर राजनीतिक लड़ाई को जमीनी स्तर पर मजबूत कर रही है और कई चुनावों में अहम भूमिका अदा करती आ रही है।


आईटी सेल ने कुछ इस तरह किया काम

भाजपा ने 2017 का विधानसभा चुनाव जीतने के लिए आईटी सेल की मदद से 52 विधानसभा क्षेत्रों को चार-चार मंडलों में बांटा। साथ ही हर विधानसभा में तीस सेक्टर बांटे और 350 बूथ प्रमुख यहां नियुक्त किए। कानपुर-बुंदेलखंड क्षेत्र के मीडिया प्रभारी मोहित पांडेय ने बताया हर विधानसभा क्षेत्र में आईटी सेल ने चार-चार मंडल बनाए। इन रणनीतिकारों ने हर विधानसभा क्षेत्र को तीस सेक्टर में बांटा था। हर विधानसभा में करीब 350 बूथ थे, जहां इतने बूथ प्रमुख रखे गए। यहां बैठी आइटी टीम के पास हर पोलिंग एजेंट तक का मोबाइल नंबर, व्हाट्सएप नंबर और फेसबुक आईडी थी। टीम के कार्यकर्ताओं ने सबसे पहले तो सभी बूथ अध्यक्षों को फोन कर बूथ कमेटियों की जानकारी ली। कमेटी के एक-एक सदस्य को फोन कर क्रॉस चेक किया। फिर मतदान के दो दिन पहले बस्तों की जानकारी ली। इसके अलावा सबसे खास यह कि प्रतिद्वंद्वी दलों द्वारा फेसबुक पर डाली जा रही पोस्ट पर लगातार नजर थी। उनका तोड़ या जवाब तैयार कर विधानसभा क्षेत्रों के कार्यकर्ताओं के व्हाट्सएप और फेसबुक पर उन्हें शेयर किया जा रहा था। वह पोस्ट वह कार्यकर्ता अपने क्षेत्र की जनता के बीच शेयर कर रहे थे। केंद्र और प्रदेश सरकार की योजनाओं का भी पूरा विवरण इस टीम ने कार्यकर्ताओं को मोबाइल पर उपलब्ध कराया गया था।


नोटबंदी-जीएसटी पर उलझाए रखा

यूपी विधानसभा चुनाव के दौरान अतिम शाह के इन रणकुंबरों ने विरोधी दलों को नोटबंदी पर ही सीमित रखा। सोशल मीडिया के जरिए इसे हवा दी और राजनेता इनके इशारों पर नाचते रहे। कानपुर की चुनावी रैली से लेकर बनारस तक अखिलेश यादव, राहुल गांधी और मायावती नोटबंदी के खजांची का नाम लेकर मोदी सरकार पर हमला करते रहे। अंसल भवन के आईटी सेल में काम करने वाले एक कर्मी ने बताया कि विधानसभा और निकाय चुनाव हमारी टीम ने बेहतर तालमेल के जरिए लड़ा। विरोधी दल के जो नेता दो दिन बाद सोचते उसका काट हम पहले तैयार कर लेते। इसी के चलते दोनों चुनाव भाजपा प्रचंड बहुमत के साथ जीती। आईटी सेल की टीम के सदस्यों ने बूथ प्रमुखों के साथ वार्ड स्तर के कार्यकर्ताओं के पास जाकर उन्हें सोशल मीडिया की ट्रेनिंग से दक्ष किया। सोशल मीडिया का कब और किस तरह प्रयोग करना है उसकी पूरी जानकारी दी। यही आईटी सेल गुजरात चुनाव के दौरान भी वहां गई और जातियों के जकड़े चुनाव को भाजपा के पक्ष में मोड़ने में अहम भूमिका अदा की।


इनके चलते सिकंदरा में भी फिरा पानी

सिकंदरा जीतने के लिए भाजपा ने बाहरी नेताओं और कार्यकर्ताओं की फौज उतार दी गई। इससे सबसे अलग आइटी टीम को खास तौर पर लगाया गया। वह मैदान में भले ही नजर न आई हो, लेकिन तैयारियों और रणनीति को अमल में लाने की बड़ी भूमिका यहां से निभाई गई। मोहित पांडेय ने बताया कि सिकंदरा विधानसभा क्षेत्र चुनाव के दौरान आईटी सेल ने मतदाताओं तक पीएम मोदी और सीएम योगी की बात ठीक तरह से सोशल मीडिया के जरिए पहुंचाई। कांग्रेस के उम्मीदवार प्रभाकर पांडेय को भी घेरा और ब्राह्मण वोट नहीं कटने दिए। साथ ही बसपा ने प्रत्याशी नहीं उतार कर सपा को अंदरखाने सपोर्ट किया। इसका भी प्रचार आईटी सेल ने सोशल मीडिया के जरिए किया और परिणाम ये रहा कि मतदान के दिन बसपा का वोट बैंक सपा के बजाय भाजपा और कांग्रेस के पक्ष में चला गया।