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ग्रामीणों को भी मिलेगा सस्ता ब्रॉडबैंड, आईआईटी कानपुर और मुंबई प्रोजेक्ट पर करेंगे काम

ग्रामीणों को सस्‍ती ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्‍ध कराने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मुंबई मिलकर काम करेंगे.
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कानपुर

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Alok Pandey

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Updated: 25 Jul 2018, 1:25 PM IST

Kanpur

ग्रामीणों को भी मिलेगा सस्ता ब्रॉडबैंड, आईआईटी कानपुर और मुंबई प्रोजेक्ट पर करेंगे काम

कानपुर। ग्रामीणों को सस्‍ती ब्रॉडबैंड सेवा उपलब्‍ध कराने के लिए आईआईटी कानपुर और आईआईटी मुंबई मिलकर काम करेंगे. यह ब्रॉडबैंड सेवा गांवों के विकास के लिए रोड मैप तैयार करने में मदद करेगी. उन्‍नत भारत अभियान के तहत आईआईटी ने यह मुहिम शुरू की है. इसके लिए कानपुर के 25 गांवों को आईआईटी गोद लेगा. पहले चरण में पांच गांवों को वाई फाई से जोड़ा जाएगा. इसके लिए आईआईटी ने अमेरिका की प्रतिष्‍ठित आईटी कंपनी कम्‍प्‍यूटर साइंस कॉरपोरेशन से सहयोग लिया है.

टीवीडब्‍ल्‍यूएस ग्रुप बनेगा
परियोजना के लिए व्‍यापक तैयारी के लिए आईआईटी कानपुर में टीवी व्‍हाइट स्‍पेस समूह की स्‍थापना होगी यह भारत का दूसरा टेस्‍ट बेड होगा. अभी तक टीवी व्‍हाइट स्‍पेस की स्‍थापना यूएस, यूके, जापान और सिंगापुर में की गई है. टाटा ट्रस्‍ट इस परियोजना में मदद को तैयार है. इसका उदेश्‍य अपने नेटवर्क टोपोलॉजी में से एक को स्‍थापित करना है जो ब्रॉडबैंड को सस्‍ता बनाएगा.

मुम्‍बई में पायलट टेस्‍ट बेड
आईआईटी बॉम्‍बे पहले ही पायलट टेस्‍ट बेड तैनात कर चुका है. महाराष्‍ट्र के पालघर जिले के सात गांव खमलाली, बहाडोली, धुक्‍कन, गंज, परगांव, हलोली और मासवान में इसका टेस्‍ट हो रहा है. यह 30 वर्ग किमी के क्षेत्र और 100 किमी की दूरी के क्षेत्र को कवर कर रहा है. आईआईटी बॉम्‍बे के करीब वाईफाई हॉटस्‍पॉट विकसित किया जा चुका है.

ऐसे मिलेंगे फायदे
आईआईटी का प्रोजेक्‍ट शुरू होने पर भूजल स्‍तर में सुधार, घर बैठे आमदनी, अपने उत्‍पाद की बेहतर से बेहतर कीमत जैसे तमाम सपनों को ग्रामीण खुद ही पूरा कर सकेंगे. आईआईटी की टीम ग्रामीणों को हर दिन शिक्षित करेंगे और उनकी बदली हुई दिनचर्या का डाटाबेस तैयार करेगी. परियोजनाओं को केंद्रीय विज्ञान एवं प्रौद्योगिकी मंत्रालय (डीएसटी) ने हरी झंडी दे दी है.

सभी को उपलब्‍ध होंगी सस्‍ती ब्रॉडबैंड सेवाएं
आईआईटी ने गांवों को डिजिटल बनाने की मुहिम में ‘सभी के लिए सस्‍ती ब्रॉडबैंड सेवाएं’ देने का सुर छेड़ा है. इस बारे में निदेशक प्रो. अभय करंदीकर ने बताया कि अगर गांव में किसी नेटवर्क से 3000 रुपये प्रति महीने का खर्च इंटरनेट पर पड़ता है तो हम उस खर्च को 100 रुपये करने में सक्षम होंगे. इतना ही नहीं आईआईटी का तो यहां तक दावा है कि वह विदेशी कंपनी के सहयोग से सस्‍ती स्‍वदेशी तकनीक को विकसित करेगा.