
छत्तीसगढ़ के इस जिले में अब भी लापता 392 युवा, कहीं जंगलों की ओर राह भटक न जाए
कवर्धा . कुछ वर्षों में जिले में माओवादियों की सक्रियता बढ़ी। हाल ही में बड़ी संख्या में माओवादी, जिसमें महिलाओं की मौजूदगी भी देखी गई है। दूसरी ओर कबीरधाम से बड़ी संख्या में युवक-युवती गुमशुदा हो रहीं हैं, जो गंभीर व चिंता का विषय बना हुआ है।
वर्ष 2014 से 2018 तक मतलब पांच साल के दौरान जिले के 948 लोगों के गुमशुदा होने की रिपोर्ट जिले के विभिन्न थानों में दर्ज कराए गए। इसमें पुलिस टीम ने बड़ी मशक्कत से ऑपरेशन मिलाप के जरिए 573 लोगों को ढूंढ निकाला, लेकिन अब भी 392 गुमशुदा हैं। इसमें युवतियों की संख्या सबसे अधिक है। अधिकतर प्रेम-प्रसंग के चलते भाग निकले हैं, लेकिन कुछ मामले संदेहास्पद हैं। क्योंकि पांच-छह वर्षों से ही जिले में माओवादियों की सक्रियता बढ़ी है। ऐसे में आशंका जताई जाती है कि कहीं गुमशुदा युवक-युवती को माओवादी अपने संगठन से तो नहीं जोड़ रहे हैं। हालांकि यह स्पष्ट नहीं है, लेकिन इससे इनकार भी नहीं किया जा सकता। इस दिशा में जागरुकता के साथ करने की आवश्यकता है। इसमें सरकारी कर्मचारी से लेकर एनजीओ की भी मदद लेनी होगी।
चिंता का विषय यह है कि गुमशुदा में सबसे अधिक महिला वर्ग है। कम पढ़ी-लिखी व युवती, नाबालिग बालिका इसमें शामिल हैं। वर्ष 2018 में पांच माह के भीतर 84 लोग गुमशुदा हुए। इसमें 56 महिलाएं, युवती व बालिकाएं रही, जबकि 28 पुरुष। इसमें पुलिस ने 27 गुमशुदा को ढूंढ निकाला है। यही स्थिति हर वर्ष की रही है।
माओवादियों के संगठन में कम उम्र, कम पढ़े-लिखे और कम समझने वालों को स्थान दिया जाता है। क्योंकि यह किसी के बहकावे में जल्दी आ जाते हैं। इस बात का जिक्र स्वयं दुर्ग रेंज के आईजी जीपी सिंह भी कर चुके हैं। उन्होंने यह भी कहा कि था माओवादियों के संगठन में महिलाओं का काफी शोषण होता है। वह बाहर आना चाहते है, लेकिन उन्हें मजबूर किया जाता है। जिसके चलते वह मजबूरी में संगठन से जुड़े रहते हैं।
जिले में आए दिन थानों में रिपोर्ट चढ़ती है कि युवक, युवती, महिला या पुरुष गुमशुदा है। इसमें अधिकतर मामले प्रेम-प्रसंग के ही होते हैं। इसमें कुछ दिनों बाद युवक, युवती वापस भी आ जाते हैं। दूसरा परिवार में विवाद के चलते भी बिना बताए घर से निकल जाते हैं। कुछ रोजी-रोटी की तलाश में निकलते हैं।
गुमशुदा पर एक नजर...
| वर्ष | गुमशुदा हुए | खोजे गए | अब भी गुमशुदा |
| 2018 | 84 | 27 | 57 |
| 2017 | 223 | 164 | 73 |
| 2016 | 247 | 207 | 40 |
| 2015 | 203 | 147 | 56 |
| 2014 | 191 | 25 | 166 |
जिला पुलिस द्वारा गांव-गांव में आस्था अभियान चलाया जाता है। इसके जरिए ग्रामीणों को शासन-प्रशासन की योजना का लाभ लेने और क्राइम से किस तरह से दूर रहे, बताया जाता है। इस दौरान माओवादियों के संबंध में बताया जाता है। इसके चलते बड़ी संख्या में ग्रामीण जागरुक हुए हैं।
जिले में माओवादियों ने घुसपैठ पूरी तरह से हो चुकी है। लोहारा से रेंगाखा और बोड़ला से पंडरिया तक यह गांव-गांव घूम चुके हैं। ग्रामीणों से बैठक कर सरकार व शासन-प्रशासन के खिलाफ भडक़ा भी रहे हैं। ऐसे में ग्रामीणों को जागरुक रखने की आवश्यकता है। इसके लिए पहल करनी होगी।
कबीरधाम के एसपी डॉ लाल उमेंद सिंह ने बताया कि महिला व पुरुष अलग-अलग कारणों से गायब हो रहे हैं। अधिकतर गुम हुए लोग मिल जाते हैं। कुछ ही लोग बाहर कमाने खाने लग जाते हैं वो वापस नहीं आते हैं। ऐसा बिलकुल नहीं है कि गुम हुए लोग माओवादियों से मिले। परिवार के लोग ही गुम होने की सूचना देते हैं।
Updated on:
3 Jun 2018, 6:44 PM IST
Published on:
3 Jun 2018, 6:44 PM IST
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