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खंडवा में करोड़ों का फल कारोबार, मंडी के नाम पर शहर के हाथ खाली

खंडवा. शहर में फलों का कारोबार करोड़ों रुपये तक पहुंच गया है, लेकिन इतने बड़े व्यापार के बावजूद यहां अब तक फल मंडी की व्यवस्था नहीं हो सकी है। इसका फायदा थोक व्यापारी उठा रहे हैं, जो अपने गोदामों से ही फलों की बिक्री कर मनमाने दाम तय कर रहे हैं। नीलामी की व्यवस्था नहीं होने से फलों के भाव तय करने में पारदर्शिता का अभाव है। वहीं, शासन को भी इस कारोबार से मिलने वाले संभावित राजस्व का लाभ नहीं मिल पा रहा है। दूसरी ओर, महंगे दामों पर फल खरीदने वाले फुटकर विक्रेताओं को ग्राहकों तक महंगे फल पहुंचाने पड़ रहे हैं।
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बुधवारा बाजार में लगे फलों के ठेले।

शहर में करीब 15 गोदामों से फलों का थोक कारोबार संचालित हो रहा है। यहां प्रतिदिन एक से दो करोड़ रुपये तक का कारोबार होने का अनुमान है। इसके बावजूद शहर में फल मंडी नहीं होने से व्यापार व्यवस्थित तरीके से संचालित नहीं हो पा रहा है। शहर में 1500 से अधिक फल विक्रेता ठेलों के माध्यम से कारोबार करते हैं, जबकि 50 से अधिक बड़ी दुकानें भी हैं। इतनी बड़ी संख्या में कारोबारियों की मौजूदगी के बाद भी फल मंडी की सुविधा नहीं होने से व्यापारियों को कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।

नीलामी नहीं होने से थोक व्यापारियों की मनमानी

फल मंडी नहीं होने का सबसे ज्यादा असर फुटकर विक्रेताओं पर पड़ रहा है। थोक व्यापारी ट्रकों के माध्यम से बाहर से फल मंगवाते हैं और अपने गोदामों से ही उनकी बिक्री करते हैं। यहां नीलामी की व्यवस्था नहीं होने से थोक व्यापारी स्वयं ही फलों के भाव तय करते हैं। फुटकर विक्रेताओं के पास दूसरे विकल्प नहीं होने के कारण उन्हें तय कीमत पर ही फल खरीदने पड़ते हैं। इससे उनके कारोबार की लागत बढ़ जाती है और इसका असर ग्राहकों की जेब पर भी पड़ता है।

महंगे दामों में फल खरीदने पर मजबूर

फल व्यवसायी राकेश जगताप और नासिर का कहना है कि वे ठेले लगाकर फल बेचते हैं। उनका कहना है कि शहर में फल मंडी नहीं होने के कारण थोक व्यापारियों की मनमानी चलती है। व्यापारी जिस भाव पर फल देते हैं, उसी कीमत पर खरीदना मजबूरी है। गोदामों में ही बिक्री होने और नीलामी नहीं होने से भाव तय करने की प्रक्रिया पारदर्शी नहीं है। महंगे दामों पर फल खरीदने के कारण उन्हें ग्राहकों को भी अधिक कीमत पर फल बेचना पड़ता है।

आसपास के जिलों में सुविधा, खंडवा में इंतजार

फुटकर विक्रेताओं का कहना है कि आसपास के जिलों में फल मंडियां संचालित हो रही हैं, लेकिन खंडवा में अब तक यह सुविधा उपलब्ध नहीं है। शहर में फल मंडी शुरू होने से नीलामी के माध्यम से फलों की कीमत तय हो सकेगी। बाहर से भी व्यापारी खरीदी-बिक्री के लिए पहुंचेंगे, जिससे प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कारोबार को व्यवस्थित करने में मदद मिलेगी। व्यापारियों का मानना है कि फल मंडी स्थापित होने से भाव निर्धारण में पारदर्शिता आएगी और फुटकर विक्रेताओं को उचित कीमत पर फल मिल सकेंगे। इसका लाभ आम उपभोक्ताओं को भी मिल सकता है।

यहां तक फलों का कारोबार

खंडवा शहर में ही फलों को कारोबार सीमित नहीं है, आसपास के क्षेत्रों की दुकानों पर भी फल यहीं से पहुंच रहे हैं। पंधाना, खालवा, हरसूद, मूंदी, पुनासा, नर्मदानगर, बोरगांव बुजुर्ग के साथ ही खरगोन जिले के भीकनगांव तक फलों की सप्लाई है। शहर के कहारवाड़ी, इमलीपुरा, मूंदीपुरा, बड़ाबम, सिनेमा चौक और पड़ावा सहित अन्य थानों पर फलों के गोदाम हैं। सबसे अधिक गोडाउन कहारवाड़ी क्षेत्र में हैं।

आंकड़ों में फल कारोबार

- 1 से 2 करोड़ रुपए प्रतिदिन के कारोबार का अनुमान।

- 15 गोदाम जहां से थोक फल कारोबार संचालित।

- 1500 से अधिक शहर में फल के ठेले लगाने वाले फुटकर विक्रेता।

- 50 से अधिक फल की बड़ी दुकानें।

- शहर में जब सब्जी मंडी, प्याज मंडी और अनाज मंडी है तो फल मंडी भी होना चाहिए। फल मंडी होने से शासन को बड़ा राजस्व मिलेगा। इस संबंध में कलेक्टर और मंडी सचिव से चर्चा कर मंडी शुरू करवाई जाएगी। - सांसद ज्ञानेश्वर पाटील।