
खंडवा : नगर निगम के लामबंद कर्मचारियों को समझाइश देतीं नगर निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत
नगर निगम कार्यालय में वर्ष 2017 से 2023 के बीच तत्कालीन निगम आयुक्तों ने शासन की गाइड लाइन को दरकिनार करते हुए 468 अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्तियां की हैं। एक साल पहले शिकायत के बाद ईओडब्ल्यू ने जांच की। लोकायुक्त ने निगम से पूछा आप के द्वारा क्या कार्रवाई की गई। हटाए जाने की आशंका पर कर्मचारी लामबंद हो गए हैं। कार्यालय के सामने कर्मचारियों ने फर्श पर बैठकर प्रदर्शन किया है।
नगर निगम में 468 अस्थायी कर्मचारियों को हटाए जाने की आशंका से मंगलवार को कर्मचारियों का गुस्सा फूट पड़ा। अखिल भारतीय सफाई मजदूर संघ के नेतृत्व में कर्मचारी निगम पहुंचे। निगम आयुक्त कार्यालय के सामने फर्श पर बैठकर प्रदर्शन किया। नेता प्रतिपक्ष दीपक राठौर मुल्लू भी कर्मचारियों के समर्थन में पहुंचे। आयुक्त के आश्वासन के बाद कर्मचारी शांत हुए।
दोपहर प्रदर्शन कर रहे कर्मचारियों ने कहा कि निगम में 468 दैनिक वेतनभोगी अस्थायी कर्मचारी और ऑपरेटर कार्यरत हैं। वर्ष 2017 से 2023 के बीच हुई नियुक्तियों को लेकर ईओडब्ल्यू ने निगम से कार्रवाई की जानकारी मांगी है। इसी के बाद कर्मचारियों को हटाए जाने की आशंका बढ़ गई है।
संगठन का कहना है कि ईओडब्ल्यू के पत्र क्रमांक 4920/ 2025 जांच प्रकरण के संदर्भ में निगम ने 20 अगस्त 2026 को कर्मचारियों को हटाने संबंधी पत्र जारी किया था। इसकी सूचना 29 सितंबर को आयुक्त नगरीय प्रशासन एवं विकास को भी भेजी गई है। मामले की जानकारी मिलते ही बड़ी संख्या में कर्मचारी निगम पहुंचे। कर्मचारियों ने निगम आयुक्त कार्यालय के सामने फर्श पर बैठकर प्रदर्शन शुरू कर दिया।
संगठन पदाधिकारियों ने कहा कि तत्कालीन आयुक्तों के प्रस्ताव पर एमआईसी ने कर्मचारियों को रखने की अनुमति दी थी। ऐसे में अब अचानक कर्मचारियों पर कार्रवाई उचित नहीं है। कर्मचारी प्रतिनिधियों के साथ चर्चा हुई। इसके बाद निगम आयुक्त प्रियंका सिंह राजावत बाहर आईं। उन्होंने कर्मचारियों को समझाइश दी। कहा कि किसी ने कर्मचारियों को भ्रमित किया है। निगम कर्मचारी हित में निर्णय लेगा। आश्वासन के बाद कर्मचारी शांत हुए।
संगठन पदाधिकारियों ने चेतावनी दी कि यदि किसी कर्मचारी को हटाया गया तो आंदोलन किया जाएगा। उन्होंने आरोप लगाया कि अयूब लाला नामक व्यक्ति आरटीआई से मिली जानकारी का उपयोग कर कर्मचारियों को परेशान और ब्लैकमेल कर रहा है। संगठन का दावा है कि संबंधित शिकायत वापस ली जा चुकी है।
ईओडब्ल्यू ने वर्ष 2017 से 2023 के बीच हुई नियुक्तियों के संबंध में निगम से पूछा है कि जांच के बाद अब तक क्या कार्रवाई की गई। मामले की फाइल निगम में फिर खुल गई है। आयुक्त ने इसे एमआईसी के समक्ष रखने की तैयारी की है। इसी सप्ताह एमआईसी की बैठक प्रस्तावित है। इसके बाद कर्मचारियों के संबंध में आगे का निर्णय होने की संभावना है।
12 से 13 करोड़ रुपए की एनपीएस राशि जमा की जाए।
आउटसोर्स कर्मचारियों को कलेक्टर दर से वेतन दिया जाए।
विनियमित कर्मचारियों को नियमित किया जाए।
फेस अटेंडेंट से हाजिरी की व्यवस्था बंद की जाए।
पत्रिका ने 2 सितंबर 2026 को किया था खुलासा। पत्रिका ने ‘ कलेक्टर दर पर ननि में हुई 468 नियुक्तियों की खुली फाइल, ईओडब्ल्यू की जांच तेज ’ शीर्षक से खबर प्रकाशित की थी। इसमें बताया गया था कि करीब तीन साल बाद अस्थायी कर्मचारियों की नियुक्तियों से जुड़ी फाइल फिर खुली है। वर्ष 2017 से 2023 के बीच पदस्थ रहे तत्कालीन निगम आयुक्तों की भूमिका को लेकर भी जांच चल रही है। अब इसी कार्रवाई की सूचना के बाद कर्मचारी लामबंद हो गए हैं।
Updated on:
07 Oct 2026 12:05 pm
Published on:
07 Oct 2026 12:05 pm
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