
खंडवा : उल्लास नवभारत साक्षरता के तहत साक्षर बनने परीक्षा में शामिल ग्रामीण।
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले के 1055 केंद्रों पर 20,924 असाक्षर शामिल हुए। इनमें 11,422 महिलाएं और 9,502 पुरुष हैं। अब लक्ष्य 2027 तक खंडवा को पूर्ण साक्षर बनाने का है। उल्लास साक्षरता की परीक्षा में 21 हजार महिलाएं और पुरुष शामिल हुए। परीक्षा में बैठने से पहले कोई उम्र के आखिरी पड़ाव पर तो किसी ने घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अक्षर ज्ञान सीखा। उत्साह से परीक्षा में शामिल हुए। और 20 हजार असाक्षरसाक्षर बन गए।
उम्र पढ़ाई की राह में बाधा नहीं बनी। किसी ने घरेलू जिम्मेदारियों के बीच अक्षर ज्ञान सीखा, तो किसी ने उम्र के उस पड़ाव पर पढ़ने-लिखने की कोशिश की, जब आमतौर पर लोग सीखने की उम्मीद छोड़ देते हैं। शनिवार को ऐसे ही हजारों लोगों ने परीक्षा देकर अपने आत्मविश्वास की नई इबारत लिखी। परीक्षा केंद्रों पर जिला समन्वयक पीएस सोलंकी समेत शिक्षकों ने उत्साह वर्धन किया और तिलक लगाकर उनका स्वागत भी किया।
उल्लास नवभारत साक्षरता कार्यक्रम के तहत जिले के 1055 केंद्रों पर 20,924 असाक्षर शामिल हुए। इनमें 11,422 महिलाएं और 9,502 पुरुष हैं। अब लक्ष्य 2027 तक खंडवा को पूर्ण साक्षर बनाने का है। सात विकासखंडों में मूलभूत साक्षरता एवं संख्यात्मक परीक्षा आयोजित की गई। इसके लिए 21,546 लोगों को शामिल करने का लक्ष्य था। इनमें से 20,924 ने परीक्षा दी। इस तरह करीब 97 प्रतिशत लक्ष्य हासिल हुआ। परीक्षा केंद्रों पर शिक्षकों ने परीक्षार्थियों का तिलक लगाकर और पुष्पमाला पहनाकर स्वागत किया। उम्र के इस पड़ाव पर पढ़ने-लिखने की कोशिश कर रहे लोगों का उत्साह बढ़ाया।
परीक्षा में महिलाओं की संख्या पुरुषों से 1,920 अधिक रही। पंधाना में 4,073 के लक्ष्य के मुकाबले 4,170 लोग परीक्षा में शामिल हुए। छैगांव माखन में 2,369 के मुकाबले 2,401 और हरसूद में 2,051 के मुकाबले 2,100 लोगों ने परीक्षा दी। खंडवा ब्लॉक में भी 2,247 के लक्ष्य के मुकाबले 2,346 परीक्षार्थी शामिल हुए। दूसरी ओर, खालवा में 6,161 के लक्ष्य के मुकाबले 5,561 लोग परीक्षा में बैठे। पुनासा में 3,136 के मुकाबले 3,050 और बलड़ी में 1,490 के मुकाबले 1,296 परीक्षार्थी शामिल हुए। खालवा में लक्ष्य और उपलब्धि के बीच सबसे अधिक अंतर रहा।
जिला परियोजना समन्वयक पीएस सोलंकी के अनुसार जिले में करीब 2.80 लाख असाक्षर चिह्नित किए गए हैं। इनमें से पिछले वर्ष तक 2.25 लाख से अधिक लोगों को साक्षर किया जा चुका है। सर्वे और साक्षरता अभियान लगातार जारी हैं। वर्ष 2027 तक जिले को पूर्ण साक्षर बनाने का प्रयास किया जा रहा है। परीक्षा केंद्रों पर पहुंचे अधिकारियों ने असाक्षरों से चर्चा कर साक्षरता का महत्व समझाया। इस अभियान का मकसद केवल अक्षर पहचानना नहीं है। लोगों को रोजमर्रा के कामों में पढ़ने, लिखने और सामान्य गणना करने में सक्षम बनाना भी है। ताकि वे अपने कामकाज में दूसरों पर निर्भर रहने के बजाय खुद फैसले ले सकें।
Updated on:
25 Oct 2026, 12:07 PM IST
Published on:
25 Oct 2026, 12:07 PM IST
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