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दर्दनाक हादसा : खेत में काम करते समय बारिश से बचने लिया पेड़ का सहारा, मां और दो बेटों की गाज गिरने से मौत

- पिता तीनों को ढूंढते हुए पहुंचे खेतों में तब देखा तीनों के शव
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कोरबा

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Shiv Singh

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Updated: 5 Jun 2018, 9:12 PM IST

दर्दनाक हादसा : खेत में काम करते समय बारिश से बचने लिया पेड़ का सहारा, मां और दो बेटों की गाज गिरने से मौत

Breaking : खेत में काम करते समय बारिश से बचने लिया पेड़ का सहारा, मां और दो बेटों की गाज गिरने से मौत

कोरबा . आकाशीय बिजली पसान क्षेत्र के गांव सैला में एक परिवार के लिए मौत का कहर बनकर टूट पड़ी। खेतों में काम कर रहे मां सहित दो बेटों की गाज गिरने से मौत हो गई है। वनांचल क्षेत्र होने के कारण अचानक मौसम बदला और गरज-चमक के साथ एकाएक बारिश शुरू हो गयी। पुलिस से मिली जानकारी के अनुसार पसान थाना क्षेत्र के ग्राम सैला में रनिया बाई (४६ वर्ष), अपने दो बेटों तुला चंद (२० वर्ष) और ईश्वर सिंह (१५ वर्ष) मंगलवार की दोपहर खेत में काम कर रहे थे। इसी बीच तेज बारिश शुरू हो गई।

बारिश से बचने के लिए मां और दोनों बेटे समीप स्थिति बरगद के पेड़ की छाया में आ गए। बस यही उन तीनों की मौत का करण बन गया। घटना की सूचना बच्चों के पिता इंद्रपाल ङ्क्षसह ने थाने में दी है। इंद्रपाल काफी देर तक पत्नी व बच्चों के घर नहीं लौटने पर जब उन्हें ढूंढते हुए खेत पहुंचा। तभी तीनों के शव खेत में देख उसके होश उड़ गए। बरगद के पेड़ में गाज गिरने के निशान देख पुलिस ने मृतकों की मौत का कारण गाज गिरना बताया। फिलहाल तीनों के शव का पीएम के लिए भेज दिया गया है।

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ग्रेजुएशन कर रहा था बेटा तुला चंद्र
गाज गिरने से इंद्रपाल सिंह का पूरा परिवार तबाह हो गया है। एक साथ परिवार के तीन सदस्यों की मृत्यु हो गई है। हादसे में मृत तुला चंद(२०) प्रथम वर्ष का छात्र था, जबकि ईश्वर सिंह(१५) आठवीं कक्षा में अध्ययनरत था। इस घटना से न सिर्फ इंद्रपाल के परिवार बल्कि पूरे गांव में शोक की लहर है।

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पेड़ पर मिले गाज गिरने के निशान
हादसे की सूचना मिलते ही पसान पुलिस मौके पर पहुंची। शवों को खेतों में पड़ा देख छानबीन शुरू की। पुलिस शव के करीब बरगद के पेड़ पर गाज गिरने के निशान मिले हैं। इस निशान के आधार पर ही पुलिस ने गाज गिरने को ही मौत का कारण बताया है।

बारिश में बढ़ जाती है घटनाएं
अभी बरसात शुरू भी नहीं हुई है कि बिजली गिरने व उसकी चपेट में आने से मौत की खबर आने लगी है। हर वर्ष बिजली की चपेट में आने से कई ग्रामीणों की मौत हो जाती है। वहीं कई पशु भी आकाशीय बिजली की चपेट में आ जाते हैं। ग्रामीण धान रोपने या पशु चराने खेत की ओर रूख करते हैं। दिन में किसी भी समय बारिश शुरू होते ही ग्रामीण पेड़ का सहारा लेते हैं और आकाशीय बिजली की चपेट में आने से मौत हो जाती है।