
अमृतधारा में 12 हाथियों की दस्तक (Photo Patrika
Elephant Terror: प्रदेश के उत्तरी वनांचल क्षेत्र में हाथियों की बढ़ती चहलकदमी से ग्रामीण खौफ में हैं और वन विभाग लगातार अलर्ट मोड पर है। दल से बिछड़े हाथी के तांडव से कई बार इस इलाके में दहशत का माहौल निर्मित हो चुका है। कई ग्रामीण अपनी जान गंवा चुके हैं। मनेन्द्रगढ़-चिरमिरी-भरतपुर जिले के बिहारपुर परिक्षेत्र स्थित प्रसिद्ध पर्यटन स्थल अमृतधारा के पास 12 हाथियों का दल पहुंचने से हड़कंप मच गया। स्थिति की गंभीरता को देखते हुए प्रशासन ने एहतियातन पूरे गांव को खाली कराया और सभी ग्रामीणों को रातभर के लिए फॉरेस्ट रेस्ट हाउस में शिफ्ट किया।
दूसरी ओर, चोटिया-बैकुंठपुर राजकीय राजमार्ग पर झुंड से बिछड़े एक उग्र दंतैल हाथी ने सड़क पर जमकर हंगामा मचाया और वीडियो बना रहे मनचले युवकों को दौड़ा दिया। भोर में 12 हाथियों का मुख्य दल सीमा पार कर कोरिया वनमंडल की ओर निकल गया, जिसके बाद ग्रामीणों और वन अमले ने राहत की सांस ली। बिहारपुर परिक्षेत्र के गरुडोल स्थित महादेवपुर जंगल में दो दिन पहले 12 हाथियों का दल दाखिल हुआ था। वन विभाग का बीट स्टाफ लगातार उनकी लोकेशन ट्रेस कर रहा था। रविवार दोपहर बाद जब हाथियों का रुख अमृतधारा गांव के कंपार्टमेंट की ओर हुआ, तो वनकर्मियों ने गांव पहुंचकर मुनादी कराई।
शाम को भोजन के बाद सुरक्षा के लिहाज से रात करीब 7:30 बजे गांव के 25 मकानों में रहने वाले 40 से अधिक ग्रामीणों और उनके बच्चों को कपड़ों और चादरों के साथ अमृतधारा फॉरेस्ट रेस्ट हाउस पहुंचाया गया। ग्रामीण रातभर फसलों और मकानों की सुरक्षा को लेकर चिंतित रहे, वहीं वन विभाग की टीम रातभर जंगल में रतजगा कर हाथियों पर नजर बनाए रही। भोर में जब हाथियों का दल कोरिया वनमंडल के देवगढ़ परिक्षेत्र में चला गया, तब ग्रामीणों को वापस घर जाने की अनुमति दी गई।
ग्रामीण राम जीत, मदन लाल, जल, सुखदेव और लाल साय ने बताया कि पिछले करीब एक दशक से हर साल अगस्त के दूसरे और सितंबर के पहले पखवाड़े के बीच 12 हाथियों का यह दल इसी पारंपरिक कॉरिडोर से गुजरता है। हाथी हर साल किसान देवसिंह और अकबर के कच्चे मकानों को तोड़ते थे, क्योंकि वे उनके पुराने रास्ते में पड़ते हैं। हालांकि, इस वर्ष राहत की बात यह रही कि हाथियों ने न तो किसी का घर तोड़ा और न ही फसलों को नुकसान पहुंचाया। वर्तमान में यह दल बैकुंठपुर वनमंडल के उत्तर तर्रा से होकर दामुज क्षेत्र में विचरण कर रहा है। वन अधिकारियों के अनुसार, यह दल केतकी झरिया, नगर और दुर्गापुर से होते हुए आगे सलबा-सलका कंदाबारी जाएगा, जहां 2 से 3 सप्ताह रुकने के बाद आगे बढ़ेगा।
12 हाथियों का दल गरुडोल के महादेवपुर जंगल से अमृतधारा की ओर बढ़ा था। ग्रामीणों की सुरक्षा प्राथमिकता थी, इसलिए दोपहर में ही अलर्ट जारी कर रात में रेस्ट हाउस में ठहराया गया। भोर में हाथी दल सीमा पार कर आगे बढ़ चुका है।
-सूर्यदेव सिंह, रेंजर, वनपरिक्षेत्र बिहारपुर
उधर, वर्षा ऋतु में झुंड से बिछड़कर अकेला घूम रहा एक उग्र दंतैल हाथी चोटिया-बैकुंठपुर राजकीय राजमार्ग पर आ पहुंचा और बीच सड़क पर टहलने लगा। हाइवे पर हाथी को देखकर लोगों की भीड़ जमा हो गई। इस दौरान कुछ युवकों ने लापरवाही दिखाते हुए हाथी के बेहद करीब जाकर वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जबकि पीछे खड़े लोग हुटिंग कर उसे चिढ़ाने लगे। इससे आक्रोशित होकर दंतैल अचानक मुड़ा और तेजी से युवकों की ओर दौड़ लगा दी। मौके पर भगदड़ मच गई और लोगों ने भागकर जान बचाई। चालकों को अपने वाहन रिवर्स करने पड़े और वन विभाग की हुल्ला पार्टी को भी गाड़ी पीछे हटानी पड़ी। कुछ देर बाद हाथी खुद जंगल में लौट गया, तब जाकर यातायात बहाल हुआ।
घटना का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ है, जिसमें एक परिवार कार की सनरूफ खोलकर अपने छोटे बच्चे को खतरनाक तरीके से दंतैल हाथी दिखाता नजर आ रहा है। वन विभाग ने इसे अत्यंत गंभीर लापरवाही माना है और एडवाइजरी जारी कर चेतावनी दी है कि दल से अलग घूम रहे या उग्र हाथियों के पास न जाएं, दूरी बनाए रखें और उनके साथ छेड़छाड़ न करें।
Updated on:
15 Sept 2026 07:45 am
Published on:
15 Sept 2026 07:45 am
