प्रदेश पिछले 12 दिन चली सेवारत चिकित्सकों की हड़ताल के आखिरी दिन तक अमानवीय साइड इफैक्ट देखने को मिले। अस्पतालों में मरीजों की कतार, इलाज नहीं मिलना, ऑपरेशन टलना, जांचें नहीं होना और बीमार मरीजों को डिस्चार्ज करने की संवेदनहीनता के बीच अब हड़ताली चिकित्सकों के कारण शवों की भी बेकद्री हुई।
ऐसे ही दो मामले बुधवार को सामने आए। बूंदी कोतवाली थाना क्षेत्र निवासी भगवती चौहान पुत्र नेमीचंद राजपूत 25 दिसम्बर को घर पर अचेत हो गया। परिजन बूंदी अस्पताल लेकर पहुंचे। वहां ड्यूटी डॉक्टर ने भगवती को मृत घोषित कर दिया। परिजनों ने पोस्टमार्टम करवाना चाहा, लेकिन चिकित्सक नहीं होने से पोस्टमार्टम नहीं हो सका। देर शाम परिजन शव को लेकर एमबीएस अस्पताल पहुंचे।