हैसियत: दाम घटे, पर वजूद कायम
व्यापारियों ने बताया कि जब से ट्रैक्टर-ट्रॉली, ट्रक व अन्य संसाधन चले हैं तब से गर्दभों की मांग कम होने लगी हैं। इसके बावजूद इनका वजूद बरकरार है। कई गांवों में तंग गलियों में यह संसाधन नहीं पहुंच पाते, वहां इनको मिट्टी, बजरी ढोने में काम में लिया जाता है। हालांकि, पहले की अपेक्षा अब गर्दभ के दाम आधे रह गए। पहले जहां 20 हजार तक गर्दभ बिक जाते थे, लेकिन पांच से छह हजार तक गर्दभ बिक रहे है।