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कोटा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों की जान को खतरा, कलक्टर-कमिशनर तक की नहीं सुनते डॉक्टर

MBS Hospital: हाड़ौती के सबसे बड़े अस्पताल में किसी भी पल बड़ा हादसा हो सकता है। मरीजों की जान खतरे में रहती है।
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कोटा

•

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Zuber Khan

•

Sep 11, 2019

MBS Hospital

कोटा संभाग के सबसे बड़े अस्पताल में मरीजों की जान को खतरा, कलक्टर-कमिशनर तक की नहीं सुनते डॉक्टर

कोटा. मौसमी बीमारियों ( seasonal illness ) के बीच एमबीएस अस्पताल ( MBS Hospital ) के इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड ( Emergency medicine ward ) को भी 'बीमारी' ने जकड़ लिया है। वार्ड में अव्यवस्थाओं का बोलबाला तो है ही, खतरा भी कम नहीं। वार्ड में ही ऑक्सीजन प्लांट है, ( Oxygen plant ) जिसमें बिजली का पैनल बॉक्स ( Electrical panel box ) खुला पड़ा है। इस पैनल बॉक्स में यदि आग लग जाए तो यहां भर्ती मरीजों की जान पर बन आएगी।

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पूर्व में कई बार अस्पताल के औचक निरीक्षण के समय संभागीय आयुक्त व जिला कलक्टर तक इस वार्ड का निरीक्षण कर चुके। तब उन्होंने भी वार्ड से ऑक्सीजन प्लांट को शिफ्ट करने के निर्देश दिए थे, लेकिन उन निर्देशों की पालना नहीं की गई। ऑक्सीजन प्लांट जहां का तहां ही है और हादसे को न्यौता दे रहा है।

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पैनल बॉक्स में लग चुकी आग
इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड के बाहर अस्थि रोग विभाग के पास लगे पैनल बॉक्स में पहले भी कई बार आग लग चुकी। बावजूद अस्पताल प्रशासन सुरक्षा बरतने के लिए कोई सख्त कदम नहीं उठा रहा।

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टूटे दरवाजे व फर्श नहीं बदला
इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड पूरा एसी है, लेकिन एसी इसे 'कूलÓ नहीं कर पाते। 30 बेड के इस वार्ड में 18 एसी हैं, लेकिन 9 ही चल रहे हैं। दो-तीन माह पहले एक महिला मरीज की मौत के बाद परिजनों ने इस वार्ड के शीशे के दरवाजे को तोड़ दिया था। उसके बाद नया दरवाजा नहीं लगा। परिसर की फर्शी भी उखड़ी पड़ी है। नर्सिंग स्टेशन की दीवार भी क्षतिग्रस्त है।

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कमरा बना, लेकिन शिफ्ट नहीं
अस्पताल अधीक्षक कक्ष के पास ही ऑक्सीजन प्लांट के लिए अलग नया कमरा बनकर तैयार है, लेकिन इमजेंसी मेडिसिन वार्ड से ऑक्सीजन प्लांट शिफ्ट नहीं किया। प्लांट में सिलेण्डरों में ऑक्सीजन भरने का काम होता है।

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हमने इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड में मौजूद समस्याओं को लेकर कई बार अस्पताल प्रशासन को पत्र लिखे हैं। अग्रिम कार्रवाई अस्पताल प्रशासन ही करेगा।
बृजमोहन, प्रभारी, इमरजेंसी मेडिसिन वार्ड

ऑक्सीजन प्लांट को जल्द शिफ्ट करवाएंगे। खुले पड़े पैनल बॉक्स व बंद पड़े एसी को भी दिखवाकर ठीक करवाएंगे।
डॉ. नवीन सक्सेना, अधीक्षक, एमबीएस अस्पताल