गैराज समिति अध्यक्ष गोपालराम मंडा और बस चालकों ने महापौर व आयुक्त को गड़बड़ी के बारे में शिकायत देकर जांच की मांग की थी, लेकिन अधिकारियों ने जांच नहीं की। इससे आठ माह में ही सिटी बसों के संचालन में करीब छह करोड़ रुपए का घाटा हो गया। चालकों ने तो आरोप लगाया कि ठेका कम्पनी की ओर से उन्हें बिना टिकट यात्रा करवाने के लिए दबाव बनाया जाता था। चालकों ने कहा कि फर्जी टिकट चलाने का काम काफी समय से चल रहा था, इसके बारे में सेवा प्रदाता कम्पनी के कर्मचारियों की भी मिलीभगत है।