
कोटा .
डेंगू-स्वाइन फ्लू से संघर्ष कर रहे कोटा में लगातार चौंकाने वाले केस सामने आ रहे हैं। एक व डेढ़ माह के दो शिशुओं के इसकी चपेट में आने पर जेके लोन अस्पताल में उपचार चल रहा है। वहीं डेंगू से सात साल की बच्ची के लीवर की नसें भी फटने का मामला सामने आया। इससे उसे पोर्टल हाइपरटेंशन हो गया यानी किडनी, लीवर व तिल्ली की नसों में रक्त प्रवाह का प्रेशर बढ़ गया है।
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके गुलाटी ने बताया कि तीनों बच्चों की हालत खतरे से बाहर है। उन्होंने बताया कि साधारण डेंगू के साथ हेमरेजिक बुखार व शॉर्क सिण्ड्रोम के मरीज भी सामने आए हैं। डेंगू से रोगियों के शरीर में अन्य कॉम्प्लीकेशन भी पैदा हो रहे हैं।
ऐसे ऐसे कॉम्प्लीकेशन
पहले प्रसूता, फिर बच्चा: हिमेटोक्रिट 41 % बढ़ी
कोटड़ी निवासी ममता पत्नी राकेश के सितम्बर में प्रसव हुआ। प्रसव के कुछ दिन बाद ही उसे डेंगू हो गया। करीब 20 दिन तक निजी अस्पताल में उपचार चला। जैसे ही मां ठीक हुई, एक माह के बच्चे के तेज बुखार आया, यह तीन चार दिन तक नहीं टूटा। उसने दूध पीना छोड़ दिया। जांच में उसे भी डेंगू पॉजीटिव आया।
सहायक आचार्य डॉ. पंकज सिंहल ने बताया कि परिजनों ने उसे 30 सितम्बर को जेके लोन में भर्ती कराया, 4 अक्टूबर को प्लेटलेट्स भी 20 हजार रह गई। रक्त में हिमेटोक्रिट 41 फीसदी बढ़ गई यानी रेड ब्लड सेल की संख्या व आकार में वृद्धि हो गई। अब बच्चा अब स्वस्थ है और दूध पी रहा है।
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डेढ़ माह की बच्ची: हीमोग्लोबिन घटा
बारां के खजूरपुरा निवासी डेढ़ माह की बच्ची बेबी को भी डेंगू पॉजीटिव होने पर जेके लोन में 5 अक्टूबर को भर्ती कराया गया। उसकी मां मंजू ने बताया कि बेटी को पांच दिन से बुखार था। बारां में डॉक्टरों को दिखाया तो खून की कमी बता कोटा रैफर कर दिया। यहां डेंगू पॉजीटिव आई। उपचार कर रहे चिकित्सकों ने कहा कि बच्ची की प्लेटलेट्स 80 हजार और हीमोग्लोबिन भी 6 रह गया था।
सात साल की बच्ची को 'पोर्टल हाईपरटेंशन'
जेके लोन अस्पताल में 30 सितम्बर को सातलखेड़ी की 7 वर्षीय खुशी पुत्री रामदयाल डेंगू शॉक सिण्ड्रोम व हेमरेज की स्थिति में भर्ती हुई। प्लेटलेट्स कम थी और खून की उल्टी भी हो रही थी। जांच में उसे 'पोर्टल हाईपरटेंशन' आया। उसे एमबीएस में गेस्टोएंट्रोलॉजिस्ट डॉ. अनिल शर्मा के पास भेजा। डॉ. शर्मा ने बताया कि पोर्टल हाइपरटेंशन ज्यादा होने से लीवर से जुड़ी आहार नली में खून नसें फूलकर बढ़ गई थीं। इन नसों के फटने से खून का रिसाव भी होने लगा। एंडोस्कोपी की मदद से आहार नली की नसों पर बैंड लगाया।
बच्चों का विशेष ध्यान रखने की जरूरत
अस्पताल अधीक्षक डॉ. आरके गुलाटी का कहना है कि बच्चों का खास खयाल रखने की जरूरत है। मच्छर काटने पर सबसे जल्दी छोटे बच्चे प्रभावित होते हैं। यह उन बच्चों के लिए खतरनाक हो जाता है जो कमज़ोर, पहले किसी बीमारी से ग्रस्त व रोग प्रतिरोधक क्षमता की कमी हो। नवजात और छोटे बच्चों का इम्यून सिस्टम पूर्ण मज़बूत नहीं होता। डेंगू से बचाव के लिए अभी कोई टीका नहीं बना है।
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बच्चों में डेंगू लक्षण
- 5-6 दिन तक तेज बुखार, बदन व सिर दर्द।
- कान में और उसके पीछे छूने पर दर्द होना।
- सांस लेने में परेशानी, नाक बहना।
- आंखों में दर्द, चक्कर और उल्टी।
- त्वचा पर रैशेस होना, मसूढ़ों से खून आना।
Updated on:
9 Oct 2017, 10:01 PM IST
Published on:
9 Oct 2017, 9:57 PM IST
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