
कोटा।
कोटा में नवनिर्मित चम्बल रिवर फ्रंट आखिरकार लंबे इंतज़ार के बाद जनता को समर्पित कर दिया गया। चम्बल रिवर फ्रन्ट भारत में विकसित प्रथम हैरिटेज रिवर फ्रन्ट है, इससे कोटा में देशी-विदेशी पर्यटकों का आवागमन बढ़ने की रही है।
चम्बल रिवर फ्रंट की 15 बड़ी बातें-
- कोटा बैराज से नयापुरा पुलिया तक 2.75 किमी की लम्बाई, चम्बल नदी के दोनों तटों पर विकसित
- 2 हजार श्रमिकों, 1 हजार कारीगरों ने सवा 3 साल में रिवर फ्रंट का सपना साकार किया
- पूरे प्रोजेक्ट पर लगभग 1400 करोड़ की आई है लागत
- रिवर फ्रन्ट के दोनों तटों पर 27 घाटों का निर्माण (चम्बल माता घाट, गणेश पोल, मरू घाट, जंतर-मंतर घाट, विश्व मैत्री घाट, हाड़ौती घाट, महात्मा गांधी सेतु, कनक महल, फव्वारा घाट, रंगमंच घाट, साहित्य घाट, उत्सव घाट, सिंह घाट, नयापुरा गार्डन, जवाहर घाट, गीता घाट, शान्ति घाट, नन्दी घाट, वेदिक घाट, रोशन घाट, घंटी घाट, तिरंगा घाट, शौर्य घाट, राजपूताना घाट, जुगनु घाट, हाथी घाट और बालाजी घाट शामिल हैं।
- आर्किटेक्ट का देशभर में अद्वितीय नमूना, पर्यटन, रोजगार, पर्यावरण संरक्षण के साथ नदी के सौंदर्यकरण जैसे कार्य किए गए
- चम्बल माता की 225 फ़ीट ऊंची संगमरमर की मूर्ति आकर्षण का केंद्र
- जवाहर घाट पर है पं. जवाहर लाल नेहरू का विश्व का सबसे बड़ा गन मेटल का मुखौटा
- दुनिया का सबसे बड़ा नन्दी भी यहां है
- एक बगीचे में 10 अवतारों की मूर्ति लगाई गई है
- बुलन्द दरवाजे से ऊंचा दरवाजा बनाया गया है
- राजपूताना घाट पर राजस्थान के 9 क्षेत्रों की वास्तुकला व संस्कृति को दर्शाया गया है
- मुकुट महल में 80 फ़ीट ऊँची छत है तथा यहाँ पर सिलिकॉन वैली भी है
- ब्रह्मा घाट पर विश्व की सबसे बड़ी घण्टी है, जिसकी आवाज 8 किमी दूर तक सुनी जा सकेगी
- साहित्यिक घाट पर पुस्तक, प्रसिद्ध लेखकों की प्रतिमाएं भी स्थापित हैं
- कोटा वालों के लिए रिवर फ्रंट पर एंट्री दो माह तक निशुल्क रहेगी
Published on:
12 Sep 2023, 1:45 PM IST
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