
जिन्हें रोकने को खर्च किए 34 लाख, फिर भी वो सड़कों पर धमके, संभल कर चलें, कहीं आप न हो जाएं शिकार
कोटा. शहर में बारिश शुरू होते ही आवारा मवेशियों ( Stray cattle ) की समस्या विकराल रूप ले लेती है। सड़कों पर मवेशियों ( stray cattle Terror ) का राज हो जाता है। सड़कों पर मवेशी विचरण करने के कारण आए दिन हादसे होते हैं। ( Road Accident ) नगर निगम ( municipal Corporation ) के प्रयास भी कागजी साबित हो रहे हैं। निगम ने पिछले पांच साल में शहर में विचरण करने वाले 26 हजार से अधिक मवेशियों को पकड़ा। ( Catch of Stray cattles ) पिछले पांच साल में निगम ने आवारा मवेशियों को पकडऩे के नाम पर करीब 34 लाख का बजट खर्च कर दिया। मोटा बजट खर्च करने के बावजूद भी समस्या कम होने के बजाए साल-दर- साल गंभीर होती जा रही है।
Read More: मौत बनकर सड़क पर दौड़ा गायों का झुंड, राहगीरों को मारी टक्कर, युवक को 5 फीट हवा में उछाल कौमा में पहुंचाया
नगर निगम की ओर से हर साल शहर में विचरण करने वाले आवारा मवेशियों की धरपकड़ की जाती है, लेकिन समस्या का कोई स्थायी समाधान नहीं हो पाता। निगम ने भाजपा बोर्ड में शहर में आवारा मवेशियों को पकडऩे का अभियान तो चलाया, लेकिन समस्या आज भी जस की तस है।
रोजाना 15 लेबर, 25 मवेशी पकड़ते हैं
आप शहर के किसी भी रूट पर चले जाएं, आवारा मवेशी सड़कों पर नजर आएंगे। निगम ने रोजाना आवारा मवेशियों को पकडऩे के लिए 15 लेबर लगा रखी हैं और प्रति दिन 25 मवेशियों को पकडऩा है। निगम ने लेबर सप्लाई के आधार पर ठेका दे रखा है। यह व्यवस्था पिछले एक माह से शुरू की गई है। पहले प्रति पशु पकडऩे पर ठेकेदार को 130 रुपए का भुगतान किया जाता था।
गौशाला तक नहीं बन पाई
गोशाला समिति अध्यक्ष पवन अग्रवाल का कहना है कि आवारा मवेशियों की समस्या का स्थायी समाधान करवाने के लिए नई गोशाला बनाने की तैयारी की थी, लेकिन साढ़े चार साल में नई गोशाला धरातल पर नहीं उतर पाई, जबकि दो साल पहले गौशाला के लिए स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट में 15 करोड़ का बजट स्वीकार हो गया था और निर्माण के लिए कार्यादेश भी जारी कर दिया था, लेकिन बाद में अधिकारियों ने ठण्डे बस्ते में डाल दिया। हाल ही बजट स्वीकृत हो गया है, हालांकि गोशाला की जमीन पर अतिक्रमण होने के कारण निर्माण की राह आसान नहीं है।
Published on:
3 Aug 2019, 8:30 AM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.