पत्थरों की घिसाई के बाद इन कारखानों से हर रोज 20 से 25 टन स्लरी निकलती है। दशकों तक खुले में फेंकी जा रही स्लरी जब पर्यावरण के लिए खतरा बनने लगी तो राष्ट्रीय हरित न्यायाधिकरण (एनजीटी) के निर्देश पर रीको ने इंडस्ट्रीयल एरिया में डम्पिंग यार्ड तैयार किया, लेकिन इसके बाद भी स्लरी की समस्या खत्म नहीं हुई तो प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड (पीसीबी) ने सेंट्रल बिल्डिंग रिसर्च इंस्टीट्यूट (सीबीआरआई) के साथ इसका समाधान तलाशने के लिए करार किया।