इसके बाद तत्कालीन जिला कलक्टर जोगाराम ने रेलवे के अधिकारियों को बुलाकर इसकी फिजिबिलटी रिपोर्ट तैयार कराई। जिसमें आरयूबी के निर्माण को स्थानीय लोगों की जरूरत के अनुरूप और निर्माण की संभावनाएं जताने के बाद उन्होंने प्रस्ताव को मंजूरी दिलाई। आरयूबी के निर्माण के लिए नगर निकास न्यास ने 5.80 करोड़ रुपए की आर्थिक सहायता रेलवे को दी, लेकिन इस बार रेलवे ने जिस ठेकेदार को टेंडर जारी किया था, वह काम शुरू होने से पहले ही टेंडर छोड़कर चला गया।