
सहरिया महिला की किस्मत बदली, राजीविका समूह से मिली मदद
देवरी @ पत्रिका. आर्थिक संकट से जूझ रही इमला सिंह सहरिया ने अपने हौसले और राजीविका के सहयोग से परिवार की गरीबी दूर की। आज वे आत्मनिर्भर हैं और पूरे परिवार का भरण-पोषण कर रही हैं। पठारी गांव निवासी इमला सिंह और पति गजरा सिंह के पास दो बीघा जमीन थी। गांव में मजदूरी के अवसर कम थे। इमला सिंह ने बताया कि आर्थिक स्थिति कमजोर थी और पति को टीबी की शिकायत रहती थी। वर्ष 2006 में, वे बीमार पति और दो बच्चों को लेकर अपने पीहर कस्बाथाना आ गई। शुरूआती दिनों में उन्हें परेशानियों का सामना करना पड़ा। बाद में वे राजीविका समूह से जुड़ीं और काम शुरू किया। समय के साथ, उन्हें 'सखी समूह' की अध्यक्ष बनाया गया। समूह की बैठकें शाम को होती थीं। वर्ष 2018 में, इमला सिंह ने सीआरपी प्रशिक्षण लिया और समूह बनाने का काम करने लगीं, जिसके बदले उन्हें प्रति माह 21,000 रुपए का भुगतान मिलना शुरू हुआ। यह भुगतान काम किए गए दिनों के लिए था। अब वे वर्ष में 50 दिन बाहर रहकर काम करती हैं, जिससे उन्हें 35,000 रुपए प्रति माह मिलते हैं। वर्तमान में 50 दिन का समूह बनाने का एक दौर चल रहा है। इमला सिंह राजीविका को वरदान मानती हैं।
दो बच्चे अच्छी शिक्षा ले रहे
ग्रामीण महिला से बात करने पर बताया कि वह और उसका परिवार राजीविका समूह को वरदान मानती है वहीं उसके दो बच्चों की अच्छी परवरिश और अच्छी शिक्षा भी राजीविका इसी के चलते हो पाई। महिला के एक बेटा और एक बेटी है। बेटी शाहाबाद कॉलेज में बीए फाइनल वर्ष में अध्ययन कर रही है वहीं बेटा12वीं कक्षा में अध्ययन कर रहा है।
Updated on:
02 Sept 2026 05:14 pm
Published on:
28 Aug 2026 06:00 am
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