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जिले की पूर्ति व्यवस्था हुई बेपटरी, बाहरी लोगों के हवाले आपूर्ति कार्यालय

लगभग-लगभग जिले की सभी तहसीलों में खाद्य प्रणली व्यस्था पटरी से उतरी हुई है...
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लखीमपुर खेरी

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Nitin Srivastva

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Updated: 1 Jul 2018, 12:14 PM IST

Supply department illegal recovery in Lakhimpur Kheri UP news

जिले की पूर्ति व्यवस्था हुई बेपटरी, बाहरी लोगों के हवाले आपूर्ति कार्यालय

लखीमपुर खीरी. जिले में पूर्ति विभाग की स्थिति बेहद ही गंभीर है। लगभग-लगभग जिले की सभी तहसीलों में खाद्य प्रणली व्यस्था पटरी से उतरी हुई है। कहीं पर राशन लोगों तक नहीं पहुच रहा तो कहीं राशन कार्ड के नाम पर लोगों की जेबों पर डाका डाला जा रहा है। कुछ इसी प्रकार का मामला धौरहरा तहसील के आपूर्ति कार्यालय का प्रकाश में आया। जहां राशन कार्ड में यूनिट बढ़ने के काम पर ग्रामीणों से खुलेआम डेढ़ सौ रुपए वसूले जा रहे हैं। यह वसूली आपूर्ति कार्यालय में लगाए गये। उन लड़कों के माध्यम से कराई जाती है। जोकि अनाधिकृत रूप से कार्यालय में काम कर रहे हैं। पूर्ति निरीक्षक कार्यालय में राशन कार्ड में यूनिट बढ़वाने अथवा आधार कार्ड लिंक कराने के लिए सीधे पहुंच रहे कार्डधारक से डेढ़ सौ रुपए वसूल किए जा रहे हैं। यदि कार्डधारक ने पैसा दे दिया है। तो सब ठीक और पैसा देने में आनाकानी की तो पंचायत अधिकारी अथवा ईओ से वेरिफिकेशन करवाने के लाने की बात कहते हैं। फिर भी जो नियम लागू होते हैं, उसके मुताबिक कार्डधारक का आवेदन सीधे लिया ही नहीं जा सकता।

बाहरी लोगों के हवाले है आपूर्ति कार्यालय

तहसील के आपूर्ति कार्यालय में 3 विकासखंडों का नाम है। लेकिन पोस्टिंग यहां सिर्फ दो इस्पेक्टर बृजेश मिश्रा और साधना श्रीवास्तव की है। इस कार्यालय में कोई सरकारी बाबू नहीं है। और ना ही कंप्यूटर ऑपरेटर है। आपूर्ति निरीक्षक ने कार्यालय में कुल 8 लोगों को लगा रखा है। जो ना सरकारी कर्मचारी हैं और ना ही संविदा कर्मी है। कार्यालय में लगे सभी कंप्यूटर और पत्रावलियों इन्हीं लोगों के हवाले है। क्योंकि निरीक्षक खूद ही हफ्ते में दो-तीन दिन के लिए कार्यालय आते हैं। इसलिए कहना गलत नहीं होगा कि पूरा आपूर्ति कार्यालय ही बाहरी लोगों के हवाले हैं। यहां तक की पत्रावली तैयार कराने व उस पर एसडीएम के हस्ताक्षर करवाने तक का काम भी यही 8 लोग करते हैं। वहीं पूर्ति निरीक्षक धौरहरा बृजेश मिश्रा का कहना है कि कार्यालय में कोई स्टाफ नियुक्त नहीं है। जो लड़के काम कर रहे हैं। उन्हें कोई वेतन नहीं दिया जाता। वह लोग कोटेदार से ही दस-बीस रुपये लेकर अपना काम चलाते हैं। यह लोग संविदा पर भी नियुक्त नहीं हैं। डेढ़ सौ रुपए वसूली की बात जानकारी में नहीं है। अगर ऐसा कोई करता पाया गया तो उसके खिलाफ कार्रवाई की जायेगी।

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