
अक्टूबर से पहले बनाए जाने हैं 2 लाख शौचालय, निरीक्षण के लिए पहुंची यूनिसेफ की टीम
लखीमपुर खीरी. दो दिवसीय भ्रमण पर आई यूनिसेफ की 20 सदस्य टीम में जिले में डेरा डाल दिया है। टीम के तमाम सदस्य ब्लॉकों पर भी गए और शौचालय निर्माण में आ रही दिक्कतों को जाना वहीं कुछ सदस्यों ने डीपीआरओ कार्यालय में भी जाकर आंकड़े जुटाए और डीपीआरओ चंद्रिका प्रसाद से शौचालय निर्माण की धीमी प्रक्रिया पर भी जानकारी ली। यूनिसेफ के सदस्य गांव में लोगों से बात कर खुले में शौच से होने वाली गंभीर बीमारियों और उनसे होने वाले नुकसान की जानकारी देकर लोगो को जागरुक भी करेंगे।
जिले को करना है शौच मुक्त
आपको बता दें कि 2 अक्टूबर तक जिले को पूरी तरह से खुले में शौच मुक्त करना है। इसके लिए अक्टूबर से पहले जिले में करीब 2 लाख शौचालय बनाए जाने हैं। मौजूदा समय में पंचायती राज विभाग द्वारा प्रतिदिन करीब 1700 शौचालय का निर्माण कराया जा रहा है। निर्धारित अवधि तक लक्ष्य पूरा करने के लिए प्रतिदिन तीन हजार शौचालय निर्माण की आवश्यकता है। ऐसे में यह सवाल उठता है। कि कहीं ना कहीं दिक्कत है। जिसे अधिकारी दूर नहीं कर पा रहे हैं।
टीम ने किया निरीक्षण
खीरी जिला में पहुंची यूनिसेफ की टीम ने ब्लॉक को और डीपीआरओ दफ्तर पहुंचकर शौचालय निर्माण की धीमी रफ्तार का बारीकी से परीक्षण किया। साथ ही यूनिसेफ की टीम आज भी अन्य ब्लॉक पर जाकर विकास खंड स्तरीय और ग्राम पंचायत स्तरीय कर्मचारियों व ग्रामीणों के साथ बैठक कर शौचालय निर्माण में आ रही दिक्कतों का समाधान करेंगे। और यह देखा जाएगा कि शौचालय निर्माण के लिए इट मिल रही है। या नहीं लोगों को शौचालय बनाने में क्या संकोच हो रहा है। प्रशासनिक व्यवस्था में निचले स्तर पर क्या दिक्कत आ रही है। ऐसे तमाम बिंदुओं पर फोकस किया जाएगा। डीपीआरओ ने बताया कि लोगों को जागरुक करने के लिए गांव में स्वच्छता ग्राही लगाए लगाये गये हैं। जो लोगों को शौचालय निर्माण के प्रति जागरूक करेंगे।
50 हजार सालाना बचा सकता है एक परिवार
उत्तर प्रदेश यूनिसेफ के हेड चिरंजीव तिवारी का कहना है कि गांव में लोग खुले में शौच जाते हैं। लेकिन तमाम प्रयासों के बावजूद वे शौचालय बनाने के लिए राजी नहीं होते हैं। जागरूकता के अभाव में वह नहीं जानते हैं कि खुले में शौच से उन्हें कितनी बीमारियों का सामना करना पड़ता है। खुले में शौच से होने वाली गंदगी के कारण पीलिया, हैजा, कालरा, लीवर खराब होना, डायरिया जैसी गंभीर बीमारियां होती हैं। उनके इलाज के लिए औसतन परिवार 1 साल में करीब 50 हजार खर्च करता है। यह प्रत्यक्ष खर्च है लेकिन इसकी बचत अप्रत्यक्ष है।
Published on:
29 Jun 2018, 7:36 AM IST
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