दरअसल ये दोनों उस कंसोर्टियम की सदस्य थी, जिन्होने नीरव मोदी और मेहुल चौकसी की कंपनी डायमंड फायरस्टार को बैंक लोन देने की मंजूरी दी थी। आपको बता दें कि, आरोप के मुताबिक कुल 31 बैंको ने गीतांजलि ग्रुप को करीब 5,280 करोड़ रुपए लोन के तौर पर दिया था। इस कंपनी की स्वामित्व नीरव मोदी के मामा मेहुल चौकसी के पास हैं। दिए गए लोन में आईसीआईसीआई बैंक के 405 करोड़ और एक्सिस बैंक की भी एक बड़ी राशि शामिल है। जांच एजेंसियों को इस बात का शक है कि नीरव मोदी और मेहुल चौकसी ने लगभग 400 शेल कंपनियां बनाई थी जिसके सभी निदेशक फर्जी थे। इन सभी कंपनियों का इस्तेमाल सारे पैसों विदेश पहुंचाने के लिए किया गया है। जांच एजेंसियों की खास नजर इन 400 में से 110 कंपनियों पर है जिनसे जुड़ी सभी जानकारी को इकठ्ठा किया जा रहा है। इन जानकारियों को इकठ्ठा करने के लिए रजिस्ट्रार ऑफ कंपनीज (आरओसी) की भी मदद ली जा रही है।