आचार्य चाणक्य ने अपनी नीति शास्त्र में अपने जीवन से जो कुछ भी सीखा और अनुभव किया उसे मार्गदर्शन के रूप में लिखा है। चाणक्य नीति में व्यक्ति के जीवन के हर पहलू सुख-दुख सभी का गहराई से जिक्र किया गया है। वहीं कहा जाता है कि जीवन में सुख-दुख धूप-छांव की तरह होते हैं जिनका आना तय है। और व्यक्ति को हर परिस्थिति से लड़कर आगे बढ़ते रहना चाहिए। साथ ही आचार्य चाणक्य ने चाणक्य नीति में बताया है कि कुछ ऐसी परिस्थितियों और दुख होते हैं जिनसे घिरा मनुष्य बहुत परेशान और बेवश महसूस करता है। इन दुखों से निकल पाना बहुत मुश्किल होता है। तो आइए जानते हैं वे कौन सी परिस्थितियां हैं जो मनुष्य को अंदर तक हिला कर रख देती हैं...