
स्किन केयर में Petroleum Jelly कैसे शामिल करें ?(representative image) image credit Magnific
Petroleum Jelly Used Tips and Tricks: स्किन केयर में हमेशा महंगी चीजें शामिल करना जरूरी नहीं है, कुछ साधारण चीजों को भी रोजमर्रा की त्वचा की देखभाल में शामिल किया जा सकता है। पेट्रोलियम जेली ऐसी ही एक चीज है, जिसका इस्तेमाल होंठों का रूखापन दूर करने और त्वचा में नमी बनाए रखने के साथ ही त्वचा से जुड़ी कई छोटी-मोटी समस्याओं में किया जा सकता है। हालांकि, इसका सही तरीके से इस्तेमाल करना जरूरी है। आइए जानते हैं कि इसे स्किन केयर में कैसे शामिल कर सकते हैं और किन बातों का ध्यान रखना चाहिए।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, अगर स्किन बार-बार रूखी हो जाती है, उसमें खिंचाव महसूस होता है या पपड़ी जमने लगती है, तो ऐसे में पेट्रोलियम जेली का इस्तेमाल राहत देने में मदद कर सकता है। दरअसल, यह त्वचा की सतह पर एक सुरक्षात्मक परत बनाती है, जिससे नमी जल्दी बाहर नहीं निकलती। इसका इस्तेमाल होंठों और पलकों के आसपास की रूखी त्वचा पर भी किया जा सकता है। बेहतर नतीजों के लिए नहाने या चेहरा धोने के बाद, जब त्वचा हल्की नम हो, तब थोड़ी-सी पेट्रोलियम जेली लगाएं। हालांकि, पलकों के आसपास इसका इस्तेमाल करते समय ध्यान रखें कि यह आंखों के अंदर न जाए।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, हल्की खरोंच, छोटे कट या मामूली चोट लगने पर पेट्रोलियम जेली घाव को ज्यादा सूखने से बचाने में मदद कर सकती है। दरअसल, जब घाव में उचित नमी बनी रहती है, तो उस पर पपड़ी कम बन सकती है और त्वचा को ठीक होने में मदद मिल सकती है। इससे निशान ज्यादा गहरा होने का जोखिम भी कम हो सकता है। इसके लिए सबसे पहले घाव को साफ करें और फिर उस पर पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाएं। घाव को रोज साफ रखना जरूरी है। हालांकि, गहरे घाव, ज्यादा खून बहने, संक्रमण के लक्षण दिखने या गंभीर चोट लगने पर डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। ध्यान दें कि पेट्रोलियम जेली गंभीर घावों के इलाज का विकल्प नहीं है।
कुछ लोगों को चलते समय जांघों के बीच या कई बार पैरों में जूते और कपड़ों की रगड़ से त्वचा पर जलन होने लगती है। ऐसी स्थिति में पेट्रोलियम जेली प्रभावित जगह पर इस्तेमाल करने से राहत मिल सकती है। दरअसल, यह एक चिकनी परत बनाकर त्वचा और कपड़ों के बीच होने वाली रगड़ को कम करने में मदद कर सकती है। इसलिए इसे जांघों या पैरों के उन हिस्सों पर थोड़ी मात्रा में लगाया जा सकता है, जहां बार-बार रगड़ लगती है।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, छोटे बच्चों की त्वचा काफी नाजुक होती है। डायपर के अंदर नमी और त्वचा के लंबे समय तक गीले रहने से रैश या लालिमा हो सकती है। इससे बच्चे को जलन और परेशानी भी महसूस हो सकती है। इसलिए डायपर रैश से बचने के लिए बच्चे की त्वचा को साफ और सूखा रखना जरूरी है। अगर रैश हो जाए, तो डायपर बदलते समय साफ और सूखी त्वचा पर पेट्रोलियम जेली की पतली परत लगाई जा सकती है। यह त्वचा पर सुरक्षा की परत बनाकर नमी और जलन पैदा करने वाले तत्वों के सीधे संपर्क को कम करने में मदद करती है। ध्यान दें, अगर रैश ठीक न हो, बढ़ता जाए या बच्चे को ज्यादा परेशानी हो, तो डॉक्टर से सलाह लें।
अमेरिकन एकेडमी ऑफ डर्मेटोलॉजी (AAD) के अनुसार, सिर्फ चेहरे और शरीर की त्वचा ही नहीं, नाखूनों की देखभाल करना भी जरूरी है। बार-बार मैनीक्योर या पेडीक्योर कराने, नेल पॉलिश के लगातार इस्तेमाल या रूखेपन के कारण नाखून कमजोर हो सकते हैं। ऐसे में पेट्रोलियम जेली नाखूनों और उनके आसपास की त्वचा यानी क्यूटिकल्स को नमी देने में मदद कर सकती है। इसके लिए नाखूनों और उनके आसपास की त्वचा पर थोड़ी-सी पेट्रोलियम जेली लगाएं।
पेट्रोलियम जेली के कई फायदे हैं, लेकिन इसका इस्तेमाल हर किसी के लिए एक जैसा नहीं होता। खासकर अगर आपकी त्वचा पर मुंहासे निकलते हैं, तो चेहरे पर इसे लगाने से बचना बेहतर है, क्योंकि कुछ लोगों में इससे मुंहासों की समस्या बढ़ सकती है। इसके अलावा, हमेशा साफ त्वचा पर पेट्रोलियम जेली लगाने के साथ ही बहुत ज्यादा मात्रा में लगाने के बजाय पतली परत में इस्तेमाल करें।
डिस्क्लेमर: यह लेख इंटरनेट पर उपलब्ध जानकारी के आधार पर सामान्य जागरूकता के उद्देश्य से लिखा गया है। यह किसी भी मेडिकल सलाह का विकल्प नहीं है। त्वचा संबंधी कोई भी समस्या होने पर हमेशा योग्य विशेषज्ञ से परामर्श करें
Updated on:
23 Oct 2026, 3:43 PM IST
Published on:
23 Oct 2026, 3:40 PM IST
Copyright © 2026 Patrika Group. All Rights Reserved.