
सुप्रीम कोर्ट में लंबित मामला और लगातार तारीखें
69,000 Teacher Recruitment Case Heats Up Again: उत्तर प्रदेश में 69,000 सहायक शिक्षक भर्ती मामला एक बार फिर चर्चा में है। सुप्रीम कोर्ट में यह मामला लंबित है, जहां लगातार तारीखें मिल रही हैं, लेकिन अभी तक निर्णायक बहस नहीं हो पाई है। इस देरी से नाराज प्रभावित शिक्षकों ने एक बार फिर आंदोलन का रास्ता अपनाने का निर्णय लिया है। वे एक मार्च से लखनऊ में महाधरना शुरू करेंगे, जो न्याय मिलने तक जारी रहेगा।
हाल ही में रायबरेली दौरे पर आए कांग्रेस नेता राहुल गांधी से प्रभावित शिक्षकों ने मुलाकात की। उन्होंने शिक्षकों की समस्याओं को सुना और न्याय दिलाने का भरोसा दिलाया। पीड़ित शिक्षकों का कहना है कि वे पिछले 4-5 वर्षों से न्याय की कोशिश कर रहे हैं, लेकिन अब तक सफलता नहीं मिली है।
शिक्षक धनंजय गुप्ता ने बताया कि राष्ट्रीय पिछड़ा वर्ग आयोग ने 29 अप्रैल 2021 को भर्ती में घोटाले की पुष्टि की थी, लेकिन सरकार ने आयोग की रिपोर्ट को लागू नहीं किया। इलाहाबाद हाईकोर्ट की सिंगल बेंच ने 13 मार्च 2023 को और डबल बेंच ने 13 अगस्त 2024 को पीड़ित शिक्षकों के पक्ष में फैसला सुनाया, जिसमें तीन महीने के भीतर न्याय देने का आदेश दिया गया था। इसके बावजूद, सरकार ने मामले को सुप्रीम कोर्ट में ले जाकर प्रक्रिया को और लंबा कर दिया है।
सुप्रीम कोर्ट में इस मामले की अगली सुनवाई 4 मार्च को निर्धारित है। इससे पहले, एक मार्च से पीड़ित शिक्षक लखनऊ में महाधरना शुरू करेंगे, जो न्याय मिलने तक जारी रहेगा। उनका आरोप है कि सरकार जानबूझकर मामले को लंबा खींच रही है, जिससे उनकी समस्याएं बढ़ती जा रही हैं।
69,000 सहायक शिक्षक भर्ती प्रक्रिया 2018 में शुरू हुई थी, लेकिन तब से यह विभिन्न विवादों और कानूनी मुद्दों में उलझी हुई है। मुख्य विवादों में कटऑफ मार्क्स, आरक्षण में विसंगतियां, गलत प्रश्न और उत्तर कुंजी में त्रुटियां शामिल हैं। इन मुद्दों के कारण भर्ती प्रक्रिया में देरी हो रही है, जिससे हजारों अभ्यर्थी प्रभावित हो रहे हैं।
पीड़ित शिक्षक निम्नलिखित मांगें कर रहे हैं:
इस महाधरना से सरकार पर दबाव बढ़ेगा कि वह पीड़ित शिक्षकों की मांगों पर ध्यान दे और न्यायिक आदेशों का पालन करे। साथ ही, यह आंदोलन अन्य राज्यों में भी समान समस्याओं से जूझ रहे शिक्षकों के लिए प्रेरणा का स्रोत बन सकता है।
69,000 शिक्षक भर्ती मामला उत्तर प्रदेश में शिक्षा प्रणाली की पारदर्शिता और निष्पक्षता पर गंभीर सवाल खड़े करता है। पीड़ित शिक्षकों का महाधरना न्याय की मांग को और मजबूत करेगा और उम्मीद है कि सरकार उनकी समस्याओं का समाधान करेगी।
Published on:
28 Feb 2025 08:13 am
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