
UP News : आज हेमवती नंदन बहुगुणा की जयंती है। बहुगुणा ने अंतिम सांस तक देश और पहाड़ों के विकास की ही फिक्र की। राष्ट्रीय राजनीति में अपना नाम दर्ज कराने वाले हेमवती नंदन ने अभिनेता अमिताभ बच्चन से चुनाव हारने के बाद राजनीति छोड़ दी थी। बहुगुणा ने अंतिम सांस तक देश और पहाड़ों के विकास की ही फिक्र की।
लेकिन राष्ट्रीय राजनीति में अपना नाम दर्ज कराने वाले बहुगुणा ने अभिनेता अमिताभ बच्चन से चुनाव हारने के बाद राजनीति से छोड़ दी थी।
पहाड़ों के सच्चे हितैषी थे बहुगुणा
हेमवती नंदन बहुगुणा का जन्म 25 अप्रैल 1919 को उत्तराखंड के पौड़ी जिले के बुघाणी गांव में हुआ। उन्होंने प्रारंभिक शिक्षा पौड़ी से ही ग्रहण की और इसके बाद इलाहाबाद विश्वविद्यालय से बीए की डिग्री हासिल की।
शिक्षा ग्रहण करने के दौरान ही बहुगुणा स्वतंत्रता संग्राम से जुड़ गए। स्वतंत्रता संग्राम हो या आजादी के बाद देश को विकास के पथ पर अग्रसर करने की बात, बहुगुणा हर मोर्चे पर अग्रिम पंक्ति में खड़े रहे। वह पहाड़ों के सच्चे हितैषी थे।
लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी
बहुगुणा 1980 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले कांग्रेस में दोबारा शामिल हो गए। इसी दौरान दौरान कांग्रेस ने सत्ता में वापसी की। बहुगुणा ने भी गढ़वाल से जीत दर्ज कि। लेकिन उन्हें कैबिनेट में जगह नहीं मिली। जिस वजह से छह माह के अंदर ही उन्होंने पार्टी के साथ ही लोकसभा की सदस्यता भी छोड़ दी थी। इसके बाद उन्होंने 1982 में इलाहाबाद की इसी सीट पर हुए उपचुनाव में भी जीत हासिल की थी।
1984 का चुनाव में राजीव गांधी ने अमिताभ बच्चन को इनके सामने खड़ा कर दिया था। बहुगुणा लोकदल से मैदान में थे। इन चुनावों में अमिताभ बच्चन ने बहुगुणा को एक लाख से ज्यादा वोटों से हरा दिया था। इस हार के बाद बहुगुणा ने राजनीति से संन्यास ले लिया था। राजनीति से संन्यास के बाद हेमवती नंदन बहुगुणा पर्यावरण संरक्षण के कार्यों में लग गए थे।
Updated on:
25 Apr 2023, 1:28 PM IST
Published on:
25 Apr 2023, 1:27 PM IST
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