
लखनऊ. उत्तर प्रदेश में विधान परिषद की 13 सीटों के लिये मतदान 26 अप्रैल को होगा। पांच मई को विधान परिषद की खाली हो रहीं सीटों पर सदस्यों का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। मौजूदा संख्या बल के हिसाब से देखें तो भाजपा 13 में से अपने 11 सदस्यों को उच्च सदन भेज सकेगी, वहीं अगर सपा-बसपा साथ रहे तो संयुक्त विपक्ष के दो प्रत्याशी जीत दर्ज कर सकेंगे। फिलहाल भले ही सत्तारूढ़ दल के पास अधिक विधान परिषद अधिक सदस्य भेजने का मौका है, लेकिन बीजेपी के पास दावेदारों की संख्या भी दूसरे दलों से कहीं ज्यादा है।
लोकसभा चुनाव से पहले विधान परिषद की 11 सीटों के जरिये भारतीय जनता पार्टी उत्तर प्रदेश में जहां जातीय समीकरण दुरुस्त करने की कोशिश करेगी, वहीं सक्रिय नेताओं के साथ दूसरे दलों से आये दिग्गजों को भी रिटर्न गिफ्ट देने की कोशिश होगी। फिलहाल भाजपा के लिये अंतिम एकादश (प्लेइंग इलेवन) चुनना इतना आसान नहीं होगा।
बीजेपी इन्हें दे सकती है मौका
दूसरे दलों से बीजेपी में शामिल होने वाले एमएलसी जसवंत सिंह, सरोजनी अग्रवाल, जयवीर सिंह, बुक्कल नवाब का नाम भी दावेदारों में शामिल है। पुराने दिग्गजों में उत्तर प्रदेश के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष लक्ष्मीकांत बाजपेई, पूर्व राज्यसभा सांसद व फायर ब्रांड हिंदूवादी नेता विनय कटियार और पूर्व मंत्री रमापति त्रिपाठी आदि के नाम पर भी विचार हो सकता है। इसके अलावा संगठन से विजय बहादुर पाठक, अशोक कटारिया, अश्वनी त्यागी और जेपीएस राठौर समेत अन्य को विधान परिषद जाने का मौका मिल सकता है।
क्या है विधान परिषद का गणित
मौजूदा समय में भाजपा और सहयोगी दलों के पास कुल 324 विधायक हैं। सपा के पास 47 और बसपा के पास 19 विधायक हैं। उच्च सदन की एक सीट जीतने के लिये 29 वोटों की जरूरत है। इस लिहाज से भाजपा आसानी से अपने 11 प्रत्याशियों को जिता सकेगी, वहीं सपा-बसपा मिलकर दो सदस्यों को विधान परिषद भेज पाएंगे। क्रास वोटिंग की संभावना लगभग न के बराबर है, क्योंकि किसी भी दल के पास ऐसे अतिरिक्त पर्याप्त वोट नहीं हैं, जो क्रास वोटिंग के बूते किसी दूसरे प्रत्याशी को जिता सकें।
Published on:
03 Apr 2018 08:01 pm
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